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पर्यटन की अपार संभावनाओं पर अल्पविराम लगाते वर्षों पुराने प्राचीन स्थल

नंदकिशोर ठाकुर,डिंडोरी ब्यूरो। आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडोरी में वैसे तो लगभग आधा दर्जन से ज्यादा स्थानों पर पर्यटन की अपार संभावनाएं दिख रही है, बावजूद परिस्थितियां व वर्तमान स्थिति को देख प्राचीन पर्यटन स्थलों पर प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं। गौरतलब है कि जिले में पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं होने के बाद भी पर्यटन स्थलों को बढ़ावा दिखता नजर नहीं आ रहा। बताया गया कि जिले भर में पर्यटन के क्षेत्रों को बढ़ावा मिलने से सैकड़ों लोगों को रोजगार के नए संसाधन मिल सकेंगे, रोजगार की नए-नए संसाधन मिलने के बाद सैकड़ों लोगों की जिंदगी बदल सकती हैं। संभावित स्थलों के बावजूद जिले भर के लगभग आधा दर्जन से ज्यादा पर्यटन संभावित स्थलों का जीर्णोद्धार करने विभागीय अमला कोई ध्यान नहीं दे रहा, जिससे हर दिन स्थलों की हालत खस्ताहाल होती जा रही है। संभावित क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने न तो प्राचीन व दुर्लभ वस्तुओं को संरक्षित करने कोई पहल नहीं की जा रही और ना ही पर्यटन स्थलों तक पहुंचने वाली मार्गों को पक्की सड़क मार्ग बनाने कोई ध्यान दिया जा रहा। जिससे वर्षों बाद भी संभावित क्षेत्रों के दायरे में आ रहे स्थलों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त व सुविधाजनक संसाधन नहीं है। बताया गया कि प्राचीन स्थलों के प्रचार प्रसार नहीं किया गया और ना ही मार्गो में पर्यटन स्थलों के उल्लेख किए गए, जिससे पर्यटकों को सही जानकारियां भी नहीं मिल पा रही है। आरोप है कि लाखों, करोड़ों के हर वर्ष आवंटन के बाद भी पर्यटन के क्षेत्रों में बढ़ावा देने जिम्मेदार लोग को ठोस पहल नहीं कर रहे, जिससे अधिकांश पर्यटन स्थल बेरंग ही नजर आ रहे हैं।

पर्यटन को बढ़ावा मिलने से होंगे रोजगार के नए अवसर :-  गौरतलब है कि जिले के लगभग आधा दर्जन पर्यटन स्थलों को बढ़ावा मिल जाने से सैकड़ों लोगों से ज्यादा के लिए रोजगार के नए संसाधन मिल जाएंगे। जिले भर के चिन्हित स्थानों पर अपार संभावनाएं के बाद भी जिले में पर्यटन को बढ़ावा देना विभागीय आमला को ठोस पहल नहीं कर रहा। जानकारी अनुसार जिले के माँ नर्मदा के कई घाटों के साथ ही जिले के शहपुरा में घुघवा नेशनल पार्क, समनापुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत कुकर्रामठ गांव स्थित प्राचीन ऋणमुक्तेश्वर शिव मंदिर स्थित है। इसी तरह जिले के जनपद पंचायत बजाग अंतर्गत ग्राम पंचायत कारोपानी में हिरणों के लिए अभ्यारण्य जैसे कई पर्यटक स्थल हैं, जहां रोजगार के पर्याप्त संभावनाएं भी है। बावजूद जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने संबंधित जिम्मेदार विभागीय अमला कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा, जिससे अब प्राचीन स्थल जर्जर व असुरक्षित नजर आ रहे हैं। बताया गया कि जिले में पर्यटन स्थलों के व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार व क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा न देने के चलते विदेशी पर्यटक मंडला से चलकर बांधवगढ़ पार्क जाते है, पर्यटक डिंडौरी जिले में नही रुकते। बताया गया कि जिले के पर्यटक क्षेत्रो का कोई प्रचार प्रसार नही हैं न ही स्थलों तक पहुंचने के लिए पक्की सड़को का निर्माण कार्य किया गया, जिससे अधिकांश पर्यटन स्थलों की जानकारी पर्यटकों को नहीं होती।

अमलेश्वर धाम नर्मदा कुंड बिहड़ तक पहुंचने के लिए नहीं है मार्ग :-  जंगल के बीच नर्मदा कुंड अमलेश्वर धाम बिहार तक पहुंचने के लिए अभी सड़क मार्ग नहीं बन पाई है, जिससे लोग स्थल तक पहुंच नहीं पा रहे। गौरतलब है कि समनापुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत खाम्हा गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर जंगल के बीच नर्मदा कुंड अमलेश्वर धाम बिहड़ स्थित है, जहां आसपास गांव के सैकड़ों लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है, जिसकी पौराणिक मान्यता भी है। बावजूद जिले में सड़क मार्ग व बिजली पहुंचाने विभागीय अमला अभी तक कोई पहल नहीं कर रहा। सड़क, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं की उपलब्धता ना होने से संभावित पर्यटन क्षेत्र भी विकास से काफी कोसों दूर नजर आ रहा है। वैसे अगर देखा जाए तो डिंडौरी जिले में कोई ज्यादा उद्योग, धंधे नही हैं, जिससे बेरोजगारी जिले में बड़ी हुई है, लोग रोजगार पाने पलायन करते भी नजर आते हैं। अगर चाहा जाए तो जिले में पर्यटन को बढ़ावा देकर रोजगार के नए संसाधन बनाए जा सकते हैं, जिससे की हजारों लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं,जरूरत है जिले के पर्यटन क्षेत्र में बदलाव लाने की। जिले भर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर कुछ किलोमीटर बाद सड़कों के किनारे बड़े-बड़े होल्डिंग्स के माध्यम से प्रचार प्रसार होनी चाहिए, पर्यटक स्थल के साथ ही जिले का चहुमुखी विकास करके पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

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