हिमाचल से डिंडोरी हजारों किलोमीटर कि दूरी तय कर महात्मा ने लाए दिव्य ज्योत

डिंडोरी, जबलपुर दर्पण ब्यूरो। हिमाचल प्रदेश से डिंडोरी तक हजारों किलोमीटर कि दूरी तय करने के बाद महात्माओं ने अखंड दिव्य ज्योत जलाकर डिंडोरी लाए हैं। जानकारी अनुसार अखंड दिव्य ज्योत जिले के प्रसिद्ध नाथ महाराज के खरगहना आश्रम में स्थापित किए गए हैं। ज्वाला देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा शहर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर की खोज हजारों वर्ष पहले पांडवों ने की थी। पौराणिक कथाओं में मां भगवती के 51 शक्तिपीठों में से एक ज्वालामुखी मंदिर काफी प्रसिद्ध है, इस मंदिर को जोता वाली मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर माता सती की जीभ गिरी थी, जहां माता ज्वाला के रूप में विराजमान तथा भगवान शिव यहां उन्मत भैरव के रूप में स्थित हैं। मंदिर का चमत्कार यह है कि यहां कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि पृथ्वी के गर्भ से निकल रहीं 9 ज्वालों की पूजा की जाती है। आजतक इसका कोई रहस्य नहीं जान पाया है कि आखिर यह ज्वाला यहां से कैसे निकल रही है। कई भू-वैज्ञानिक ने कई किलोमीटर की खुदाई करने के बाद भी यह पता नहीं लगा सके कि यह प्राकृतिक गैस कहां से निकल रही है। ज्वाला देवी मंदिर के रोचक तथ्य तो यह है कि आज भी इस ज्वाला को कोई भी बुझा नहीं पाया। गौरतलब है कि ज्वाला देवी मंदिर में बिना तेल और बाती के नौ ज्वालाएं जल रही हैं, जो माता के 9 स्वरूपों का प्रतीक हैं। मंदिर एक सबसे बड़ी ज्वाला जो जल रही है, वह ज्वाला माता हैं और अन्य आठ ज्वालाओं के रूप में मां अन्नपूर्णा, मां विध्यवासिनी, मां चण्डी देवी, मां महालक्ष्मी, मां हिंगलाज माता, देवी मां सरस्वती, मां अम्बिका देवी एवं मां अंजी देवी स्थित है।



