पालकों के असहयोग से शिक्षक हताश-परेशान।
जब रिकॉर्ड ही नहीं देंगे तो कैसे बनेगा जाति प्रमाण पत्र..?
जबलपुर दर्पण । मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान कार्यक्रम के तहत समस्त शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के इस महाअभियान मे जाति प्रमाण पत्र बनवाने हेतु शिक्षा विभाग का अमला जोर -शोर से जुट गया है किन्तु पालकों एवं छात्र-छात्राओं द्वारा जो जाति प्रमाण पत्र आवेदन फार्म में लगने वाले आवश्यक कागजात/ दस्तावेज लगने है जैसे अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति हेतु वर्ष 1950 से एवं अन्य पिछड़ा वर्ग हेतु वर्ष 1984 के दस्तावेज उपलब्ध करवाना पालकों /अभिभावकों का कार्य है,जो कि ना तो अधिकांश पालकों/अभिभावकों के पास मौजूद हैं।मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर के अनुसार अनेक छात्र-छात्राएँ तो नाना-नानी, मामा -मामी या दादा-दादी के यहाँ गए हैँ। ऊपर से शादी-विवाह के कारण सहयोग ही नहीं कर रहे। जब साल भर इन छात्र -छात्राओं से जाति प्रमाण पत्र हेतु आवश्यक दस्तावेजों को समय रहते जमा करने कहते रहे परन्तु इन्होंने तथा इनके पालकों ने गंभीरता से नहीं लिया।जिसका खामियाजा ग्रीष्म कालीन अवकाश में शिक्षक घर -घर घूमकर भुगत रहें है और असयोगातमक व्यवहार से हताश भी हैँ।जिन भी छात्र-छात्राओं ने दस्तावेज समय पर जमा कर दिये उनके सारे दस्तावेज तो शिक्षक पहले ही लोकसेवा केंद्र में जमा कर चुके हैं। मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह ठाकुर ने बताया कि गर्मियों की छुट्टियों में,अब विडम्बना यह है कि जिन बच्चों ने पहले ही दस्तावेज शिक्षकों के पास जमा नहीं किये तो अब दस्तावेज कैसे प्राप्त करें। इस विकराल समस्या का समाधान कैसे संभव हो। वरिष्ठ कार्यालयों से प्रतिदिन अद्यतन प्रगति रिपोर्ट मांगी जा रही है, शिक्षक हताश- परेशान है कि करें तो क्या करें। अतः शासन प्रशासन से मांग है कि जाति प्रमाण पत्र आवेदन तैयार करने में जो आवश्यक दस्तावेजों का सरलीकरण किया जावे या कुछ ऐसे निर्देश दे ताकि इस महाअभियान मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान, शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कार्य को सफलता के साथ पूर्ण किया जा सके।निर्धारित लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सके।मध्यप्रदेश अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संगठन के दिलीप सिंह ठाकुर, निरंद सिंह, जी आर झारिया, अरविन्द दीक्षित, अरविन्द विश्वकर्मा, भास्कर गुप्ता, विश्वनाथ सिंह, आकाश भील, आदेश विश्वकर्मा, ऋषि पाठक, दुर्गेश खातरकर, राकेश मून, धर्मेंद्र परिहार, चंदा सोनी, पुष्पा रघुवंशी, शैलेश पंड्या, संजय उपाध्याय, धर्मेंद्र परिहार, संदीप परिहार, माधव पाण्डेय, महेश मेहरा, अजय श्रीपाल, सुरेंद्र परसते, भोजराज विश्वकर्मा, अजब सिंह, देवराज सिंह, सुल्तान सिंह, इमरत सेन, राशिद अली, अंजनी उपाध्याय, चंद्रभान साहू, गंगाराम साहू, भोगीराम चौकसे, नितिन तिवारी, लोचन सिंह,आर पी खनाल, एस बी रजक, धनराज पिल्लै, संतोष श्रीवास्तव, संतोष चौरसिया, गोपी शाह, रवि जैन, अफ़रोज़ खान, रवि केवट, पवन सोयाम, रामदयाल उइके, रामकिशोर इपाचे,आसाराम झारिया, समर सिंह, आशीष कोरी, आशीष दीक्षित, पंकज जैन, अनूप दहायत, ब्रजवती आर्मो,कल्पना ठाकुर, रेनू बुनकर, अर्चना भट्ट, अम्बिका हँतिमारे, शायदा खान, शबनम खान, सुमिता इंगले, प्रेमवती सोयाम शबनम खान इत्यादि ने शासन -प्रशासन से जागरूकता अभियान चलाने, सरलीकरण करने एवं स्व विवेक से सर्वमान्य निर्णय लेने की मांग की है।



