जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

अमरकंटक ताप विद्युत ग्रह में सेवानिवृत्त किये गए ताप-विद्युत इकाइयों के रिक्त स्थान पूर्ण करें

जबलपुर दर्पण।ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के संज्ञान में आया है कि मध्य-प्रदेश उत्पादन कंपनी द्वारा अमरकंटक ताप विद्युत ग्रह में विद्युत उत्पादन की क्षमता में वृद्धि करने हेतु 1X660 MW की नवीन इकाई की स्थापना हेतु, MPPGCL एवं SECL के बीच MoU हस्ताक्षरित कर एक जॉइंट वेंचर कंपनी का गठन करने का निर्णय लिया गया है,जो कि उत्पादन कंपनी के कर्मियों एवं देश/प्रदेश हित में नहीं है। अत्यंत खेद का विषय है कि उपरोक्त वस्तुस्थिति के बावजूद अमरकंटक ताप विद्युत गृह हेतु नवीन इकाई की स्थापना मध्य-प्रदेश सरकार के पूर्ण स्वामित्व में न कराकर MPPGCL द्वारा SECL के साथ जॉइंट वेंचर हेतु MoU हस्ताक्षरित किया गया एवं यह निर्णय लिया गया है कि नवीन इकाई की स्थापना जॉइंट वेंचर कंपनी के माध्यम से किया जायेगा, जिसमे लगभग दोनों ही कंपनियों को 15-15% इक्विटी लगानी होगी। जबकि ज्ञात हो कि मध्य-प्रदेश शासन द्वारा गठित कमिटी ने दो इकाइयों (660MW X 2) को MPPGGL के पूर्ण स्वामित्व में स्थापना की अनुसंशा की थी। साथ ही यहां यह भी उल्लेख करना अनिवार्य होगा की इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में दिए गए प्रावधानों के अनुसार कर्मियों की सेवा शर्तों का ध्यान रखा जाना अनिवार्य है, किन्तु फेडरेशन के संज्ञान में यह भी आया है कि कथित MoU में कार्मिकों की सेवा शर्तों एवं करियर प्लानिंग का भी कोई जिक्र नहीं किया गया है न ही नवीन इकाई के ओ.एंड म. का कोई जिक्र किया गया है। ऐसे में विद्युत कर्मियों में अपना भविष्य अंधकारमय देखते हुए अत्यंत चिंतित एवं भारी आक्रोश है। विद्युत मंत्रालय; भारत सरकार द्वारा दिसम्बर 2010 में इलेक्ट्रिसिटी एक्ट-2003 के सेक्शन 3 के तहत “विद्युत टैरिफ पालिसी” का स्पष्टीकरण जारी किया गया था, जिसके अनुसार “मौजूदा परियोजनाओं के विस्तार के मामलों को छोड़कर या जहां एक चिन्हित विकासकर्ता के रूप में राज्य नियंत्रित/स्वामित्व वाली कंपनी है और जहां नियामकों को मानदंडों के आधार पर टैरिफ निर्धारण का सहारा लेने की आवश्यकता होगी, को छोड़कर बिजली की सभी भविष्य की आवश्यकता को वितरण लाइसेंसधारियों द्वारा प्रतिस्पर्धात्मक रूप से खरीदा जाना चाहिए” अर्थात वितरण लाइसेंस धारियों द्वारा विद्युत क्रय अनुबंध (PPA) के द्वारा विद्युत क्रय उपरोक्त स्पष्टीकरण अनुसार किसी नए विद्युत उत्पादक से किया जाना संभव नहीं है।मरकंटक नवीन परियोजना हेतु PPA (विद्युत क्रय अनुबंध) अनुमति‘ राज्य नियंत्रित/स्वामित्व वाली कंपनी’ होने एवं ‘मौजूदा परियोजनाओं के विस्तार’ के कारण ही प्राप्त हुई है, जिसे एक प्राइवेट कंपनी के नाम पर स्थानांतरित कदापि नहीं किया जा सकता है ।यदि ऐसा किया गया तो उस परिस्थिति में जॉइंट वेंचर कंपनी द्वारा विद्युत क्रय अनुबंध म.प्र.पॉ.मै.कं.लि.के साथ TBCB (अर्थात प्रतिस्पर्धात्मकता) के माध्यम से प्राप्त करना होगा, अन्यथा की स्थिति में यह विद्युत मंत्रालय; भारत सरकार के उल्लेखित नियम का खुला उल्लंघन होगा । जब मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी द्वारा परियोजना हेतु समस्त स्वीकृति जैसे कि पर्यावरणीय, जल, कोयला, भूमि, वन्य भूमि, विद्युत संचार एवं 100% ऊर्जा हस्ताक्षरण हेतु पी.पी.ए.,म.प्र.पॉ.मै.कं.लि.के नाम पर काफी लम्बे समय के उपरान्त प्राप्त हुए है, ऐसे में फिर समस्त स्वीकृतियों को एक नवीन कंपनी (जिसका अभी तक गठन ही नहीं हो पाया है) के नाम पर स्थानांतरण में व्यर्थ समय गवाना एवं उसमें अतिरिक्त पूंजी व्यय करना पूर्णतया अनुचित नहीं होगा ? हालांकि ऐसे में परियोजना में देरी को भी टाला नहीं जा सकता, जिसका सीधा नुकसान शासन एवं जन-मानस को ही होगा, जबकि जितनी धन राशि हेतु SECLका मुख देखा जा रहा है उतनी तो परियोजना में विलंब से लागत में वृद्धि की संभावना को नहीं टाला जा सकता है।

उपरोक्त के अतिरिक्त यदि कथित परियोजना पूर्णत: मध्य प्रदेश शासन द्वारा क्रियान्वित की जाती है तो उपरोक्त उल्लेखित विवादों का प्रश्न ही नहीं होता,अपितु 660 MW कि सुपर क्रिटिकल प्लांट होने के कारण जो की सिंगाजी (2X660 MW)एवं सतपुड़ा से परिलक्षित की जाने वाली (1X660 MW) के समान ही होगी, जिससे आपातकालीन समय में अतिरिक्त उपकरणों का आदान-प्रदान सरलता से किया जा सकेगा एवं कुल श्रमशक्ति भी न्यूनतम आवश्यकता होगी ।साथ ही MPERC द्वारा परिरक्षित किये गए नॉर्म्स “राज्य के विद्युत मांग में नियुक्त 30% प्रदेश कि स्वयं की उत्पादन क्षमता रखने हेतु” का भी अनुपालन किया जा सकेगा। अतः मान्यवर, ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन आपसे विनम्र अनुरोध करता है कि देश के अंदर हुए अधिकतर जॉइंट वेंचर के माध्यम से बनी नई कंपनियों की कार्यशैली और निराशाजनक अनुभव को सज्ञान मे लेते हुए मध्य-प्रदेश शासन द्वारा गठित कमिटी एवं MPERC की अनुशंसा अनुसार (अर्थात 660 MWकि दो इकाइयों का निर्माण मध्य-प्रदेश विद्युत उत्पादन कंपनी द्वारा अनिवार्य रूप से करना एवं राज्य कि कुल विद्युत् मांग में न्यूनतम 30% प्रदेश की स्वयं की उत्पादन छमता रखना) और समस्त उपरोक्त पहलुओं पे गंभीरता से विचार करते हुए प्रदेश हित में अमरकंटक तापीय परियोजना में उत्पादन कंपनी द्वारा मध्य-प्रदेश शासन कि पूर्ण स्वामित्व वाले नवीन पावर हाउस की स्थापना हेतु, तत्काल संबंधितों को निर्देशित किया जाए। जिससे प्रदेश में विद्युत की बढ़ती मांग और सेवानिवृत होती इकाइयों के चलते प्रदेश की स्वयं की उत्पादन क्षमता में कमी ना आये एवं मध्य प्रदेश विद्युत् उत्पादन में स्वाबलम्बी बना रहे। इससे प्रदेश की न केवल सर्वांगीड़ उन्नति होगी अपितु प्रदेश की आमजनता भी अपने आप को सुरक्षित महसूस करेगी ।

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