जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेशसाहित्य दर्पण

आदर्श नारी का श्रृंगार शालीनता

जबलपुर दर्पण। जिसने भी देखा गरिमा को हरपल हंसते हुए मधुर मुस्कान लिए पाया। क्यों न खिलखिलाए गरिमा‌ ? मायके जैसा ससुराल जो मिला । जितना प्यार गरिमा को अपने माता-पिता श्रीमती वंदना और रमेश तिवारी से मिला उससे अधिक प्यार ससुराल में आकर अपने सास-ससुर श्रीमती मनीषा और श्री अनिल शुक्ला से मिला ‌। एक बाबुल के घर से निकली और दूसरे बाबुल के घर में आई ‌। मायके में भी बिटिया और ससुराल में भी रानी बिटिया। सास-ससुर मनीषा और अनिल ने बहु होने का एहसास ही नहीं कराया, बनाया तो बनाया केवल रानी बिटिया बनाया। यहां तक की सास-बहू श्रीमती मनीषा शुक्ला और श्रीमती गरिमा के मध्य, ननद-भाभी श्रीमती नेहा पांडेय (निक्की) और गरिमा के मध्य आज तक कोई भी मतभेद और न कभी मनभेद हुए गरिमा के हर काम को सासू माँ ने सराहा, सहयोग किया। बहुत ही सह्रदय ननद है नेहा अपनी प्यारी भाभी गरिमा की बहुत अच्छी सहेली है। गरिमा भी नेहा दीदी को बहुत सम्मान देती है । मै किसे प्रथम स्थान पर रखूं, अभी तक हम यह तय नहीं पाये। इसे ही आदर्श परिवार की संज्ञा से अलंकृत करना उचित समझता हूं । गरिमा के न केवल मुख पर हृदय में भी प्रफुलता देखी जा सकती है। मर्यादा के साथ-साथ सहजता और सरलता के आभूषण भी पहने रखती है गरिमा। गरिमा की बहुत ही क्यूट नटखट तरंगायित 2 वर्षीय एक बिटिया है अग्रिमा (श्रीयम) । बहुत ही मासूम‌ है और चुलबुलापन लिए हुए हैं । शुक्ला भवन का मुख्य द्वार खुला नहीं कि सोसाइटी की गली में दौड़ पड़ती है अग्रिमा (श्री) फिर बहुत ही सुंदर एक दृश्य देखने को मिलता है। बिटिया अग्रिमा (श्री) आगे आगे और मम्मी गरिमा पीछे पीछे जब दौड़ती है तो यूं जान पड़ता है जैसे यशोदा मैया कन्हैया के पीछे दौड़ रही हो । गरिमा के मुख पर केवल ममता और मधुर मुस्कान ही दिखती है। वात्सल्यता की मूर्ति गरिमा बिटिया पर न खीझती है और न ही डांटती है, दौड़ते दौड़ते केवल मुस्कुराती रहती है । एक तो ससुराल बहुत अच्छा मिला दूसरे स्वयं एम0 कॉम और बी0 एड, अभूतपूर्व प्रज्ञता की मिसाल। माता-पिता का अनुगत नारी को सम्मान देने वाला अनुराग शुक्ला, ऐसा जीवनसाथी पा गरिमा धन्य हो गई। संयोग देखिए श्री अनिल शुक्ला और श्री रमेश तिवारी का आर्मी के पवित्र और सिद्ध मानस मंदिर में दोनों बच्चों के संबंध हेतु मिलना तय हुआ ‌‌। प्रथम बातचीत में ही रिश्ता पक्का हो गया ‌और 22 फरवरी 2016 को सिविल लाइन से तिलहरी जोगनी स्थल बारात आ गई और तिवारी भवन के विवाह मंडप में अनुराग और गरिमा ने 7 फेरे लेकर शादी के अटूट बन्धन में बंध गए। हमें तो अनुराग गरिमा की जोड़ी अत्यंत अनुपम और अद्वितीय लगती है। अभी एक वर्ष भी नहीं हुआ गरिमा को इस सोसाइटी में आए हुए अपनी सम आयु महिलाओं के साथ तो ऐसी घुलमिल गई है जैसे वह इन्हें बरसों से जानती हो । अपनी सभ्यता भद्रता शिष्टता शालीनता के कारण ही वह इतनी शीघ्र इनसे घुल मिल गई है‌ । गरिमा को संस्कार संहिता कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी ।अपने संस्कारों के अनुरूप गरिमा भगवान भक्ति में लीन,गृह कार्यो में तल्लीन रहती है स्वादिष्ट भोजन और पकवान बनाने का अभूतपूर्व हुनर। श्रीमती गरिमा ने बताया कि मेरे पति अनुराग की भी बिटिया रानी श्रीयम अग्रिमा के लालन पालन, प्रभु भक्ति की पूजा, अर्चना में विशेष लगन रहती है । गरिमा ने कहा कि हम सबकी जीवन दायनीय नर्मदा माँ के पावन तट पर बसी हमारी संस्कारधानी जबलपुर में
विश्व विख्यात कथा वाचक,बागेश्वर धाम बाला जी सरकार के पीठाधीश्वर संत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शुक्ला शास्त्री, 25 से 31 मार्च तक पनागर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन ग्लोबल मेडिकल कॉलेज के दिव्य दरवार में दीक्षा समारोह का भव्य आयोजन किया गया । मेरे पति अनुराग की प्रबल इच्छा भी थी कि अवसर मिलेगा तो गुरु जी से दीक्षा लेगें। मेरे मन मे भी यह शुभ संकेत हुआ कि बाला जी सरकार के भक्त गुरु जी ने हमारी अर्जी स्वीकार कर ली है तभी तो मन मे ये सुविचार आया और हमने पंडित धीरेन्द्र कृष्ण जी को ही अपना धर्म गुरु बनाने का संकल्प लिया। गौरवशाली शुभ मुहूर्त में 31 मार्च को पूज्य गुरु जी ने हमें पवित्र गुरु मंत्र, दीक्षा प्रदान कर अपना शिष्य बनाया, यह परम् सौभाग्य हमें मिला। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को अपने गुरू के रूप में पाकर हम गरिमा अनुराग अपने आपको धन्य मानते। गुरुदेव ने इस अवसर पर गरिमा अनुराग की 2 वर्षीय बिटिया श्रीयम अग्रिमा को भी गोद मे लेकर आशीर्वाद दिया । इस चमत्कार के लिए गरिमा के पति अनुराग शुक्ला कहते है कि पहले से ही गुरु धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के प्रति अटूट श्रद्धा भक्ति,विश्वास, सम्मान है, मन ही मन उन्हें अपना गुरु मान ही चुका था और मेरा संकल्प था कि पूज्य गुरुजी का जबलपुर आगमन होते ही उन्ही से गुरु दीक्षा लूंगा । मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता और सौभाग्य की बात है कि यह शुभ अवसर संस्कारधानी के भगवान हनुमान भक्त लोकप्रिय विधायक सम्माननीय श्री सुशील इंदु तिवारी, श्रीमती माया तिवारी व उनके परिवार जनों द्वारा पनागर में भव्य और दिव्य श्रीमद्भागवत कथा की अमृत वर्षा गुरुजी की अमृत वाणी से कराने का विशाल आयोजन किया गया। गरिमा कहती है कि इस दीक्षा अनुष्ठान को पूर्ण करने में मेरी सासू माँ श्रीमती मनीषा शुक्ला की दिन भर की निर्जला तपस्या का प्रतिफल मानती हूं । जो दीक्षा स्थल के मुख्य द्वार पर गुरू दर्शन के लिए भीड़ में बैठी रही। आदर्श नारी का श्रृंगार शालीनता है जिसका भव्य और समाज में बहुत बड़ा स्थान है ।

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