पिड़रूखी गांव में तालाब और खेत का लेवल हुआ एक, लेकिन जिम्मेदारों ने नहीं कराया जीर्णोद्धार

डिंडोरी, जबलपुर दर्पण ब्यूरो। एक तरफ सरकारें जल संरक्षण के लिए हर साल करोड़ रुपए खर्च कर रही है, ताकि जल को संरक्षित किया जा सके। सरकार की योजनाओं में एक अमृत सरोवर योजना, जहां नए-नए तालाबों के निर्माण कार्य काराकर जल को बचाने की कवायद चल रही। लेकिन जिले में यहां ऐसे सैंकड़ों वर्षों पुराने तालाब होंगे जिनको संरक्षण करने विभाग के जिम्मेदार लोग कोई रूचि नहीं ले रहे, जिससे आने वाले भीषण गर्मी में मौसम में ग्रामीणों को पानी के लिए परेशान होना पड़ सकता है। ताजा मामला जिले के जनपद पंचायत बजाग अंतर्गत ग्राम पंचायत पिड़रूखी गांव में सामने आया है, जहां ग्रामीणों के जीवन दायिनी कहें जाने वाले वर्षों पुराने पुरनिहा तालाब का जीर्णोद्धार करने पंचायत के जिम्मेदार कर्मीयों द्वारा अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। बताया गया कि अब हालात ऐसे हैं की खेत और तालाब का लेवल एक हो गया है, बावजूद पंचायत के जिम्मेदार कर्मीयों द्वारा वर्षों पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार करने कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों की माने तो गांव में दो तालाबों के अलावा पानी के लिए कोई ठोस अन्य व्यवस्था नहीं है, इन्हीं तालाबों के सहारे ग्रामीणों का नहाना-धोना, मवेशियों को पानी पिलाने के लिए अन्य जल स्त्रोतों का संसाधन नहीं हैं। ग्रामीणों ने बताया कि तालाबों का जीर्णोद्धार करने की मांग पंचायत कर्मियों से लंबे समय से कर रहे हैं, बावजूद कोई सार्थक कदम ना उठाकर लापरवाही बरती जा रही है, नतीजा यह है कि खेत और तालाब का लेवल एक हो गया है। मामले को लेकर ग्राम पंचायत सचिव ईश्वर सिंह राजपूत से की गई, उनका कहना था कि तालाब का जीर्णोद्धार कराने के लिए अभी फाइल भेजी गई है, लेकिन काम की स्वीकृति नहीं मिल रही है।



