जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

बागेश्वर धीरेन्द्र शास्त्री द्वारा बसोर समाज के विरुद्ध जातिगत शब्द बोलकर अपमानित करने के विरोध में आक्रोशित रैली निकाली

जबलपुर दर्पण।आपको अत्यंत दुःख के साथ साथ बसोर समाज के सभी जाति व उपजातियों में उपजा असंतोष एवं रोष जो कि दिनांक 02.09.2023 को राजस्थान के सीकर जिले में धीरेन्द्र शास्त्री द्वारा हजारों की संख्या में उपस्थित जन समुदाय के सामने अपनी कथित कार्यशैली के दौरान किसी ब्राहम्ण व्यक्ति से संवाद करते समय उसे सार्वजनिक रूप से अपनी आमा को श्रेष्ठ बताते हुए तथा अपने चमत्कारों को प्रमाणित करने की नीयत से मुक्त ब्राहम्ण व्यक्ति द्वारा जब यह कहा गया कि “मैं भी ब्राहम्ण हूँ” तब धीरेन्द्र शास्त्री द्वारा बसोर समाज को अपमानित करने की नीयत से सार्वजनिक रूप से यह कहा गया कि “क्या मैं बसोर हूँ” इस संवाद से स्पष्ट रूप से यह दर्शित होता है कि धीरेन्द्र शास्त्री द्वारा ब्राहम्ण समाज से निम्न एवं हेय तथा अत्यंत निची जाति बसोर है इस आशय से “बसोर जाति” के विरूद्ध जाति सूचक शब्द सार्वजनिक सभा में व्यक्त कर बसोर समाज को बिन कहे शब्दों के माध्यम से ही हजारों लोगों के सामने अपमानित किया है। उक्त संवाद का वीडियों सोशल मीडिया पर प्रसारित होने पर बसोर समाज के सभी जातिय माताओं बहनों एवं बन्धुओं ने तथा समाज के अन्य वर्गो ने लाखों की संख्या में उक्त वीडियो देखने के उपरांत यह स्पष्ट रूप से जाना समझा है कि धीरेन्द्र शास्त्री जो कि संयुक्त बसोर समाज जो कि संपूर्ण भारत में हिन्दूत्व राष्ट्र को स्थापित करने हेतु स्वयं को संकल्पित बता रहे हैं तथा बसोर समाज सहित अन्य जातियों को भी उसमें समाहित करने का दावा करते है फिर भी वे जाति भेद तथा ऊँच – नीच की मानसिक कुंठा से ग्रसित है और व आज भी हजारों वर्षों से जातिय आधार पर अनुसूचित जाति, जनजाति की हजारों जातियों को कुछ जाति विशेष के वर्गों से निम्न श्रेणी का मानते हुए उनके साथ अत्याचार, शोषण व जाति सूचक शब्द बोलकर उन्हें अपमानित करने से पीछे नहीं रहते तथा जब तब हजारों वर्षों से इस शोषित समाज का शोषण तथा दोहन करते आ रहे है तथा समाज में उन्हें उचित स्थान व सम्मान देने में उन्हें परेशानी होती है उसी जातिय भेदभाव के चलते धीरेन्द्र शास्त्री ने सार्वजनिक रूप से “बसोर जाति” के विरुद्ध ब्राहम्ण जाति से जातिगत भेद भाव को प्रकट करते हुए बसोर समाज की तुलना जातिगत शब्द बोलकर बसोर समाज का उपहास कर बसोर समाज को अपमानित किया है इस तरह धीरेन्द्र शास्त्री द्वारा किए गए कृत्य से भारत वर्ष में निवासरत् सभी बसोर जाति के लोगों में गंभीर रोष व असंतोष उत्पन्न हो गया है तथा सभी बसोर जाति के लोग स्वयं को अपमानित महसूस कर रहे है और उनमें इस घटना को लेकर भारी अक्रोश व क्षोभ उत्पन्न हुआ है। इसी कारण से भारत वर्ष के अनेक शहरों में धीरेन्द्र शास्त्री का विरोध हो रहा है और उनके विरूद्ध अनवरत ज्ञापन दिए जा रहे है इसी कड़ी में जबलपुर जिले के सभी बसोर समाज के निवासी यह ज्ञापन माननीय जिलाध्यक्ष महोदय के माध्यम से आपके समक्ष प्रेषित कर रहे है, ज्ञापन के साथ धीरेन्द्र शास्त्री द्वारा उपरोक्तानुसार किए गए संवाद की वीडियो क्लिपिंग जो पेन ड्राइव में कॉपी की गई है भी इस ज्ञापन के साथ प्रेषित की जा रही है तथा बसोर समाज के हजारों लाखों लोगों के मोबाइल में उक्त वीडियो क्लिपिंग वायरल हुई है जिसे भी आप माननीय के माध्यम से यदि आवश्यकता हो तो आपके दिए गए मोबाइल नम्बर पर उक्त वीडियों क्लिपिंग हजारों लोगों के मोबाइल से आपको प्रेषित की जा सकती है, धीरेन्द्र शास्त्री के उक्त संवाद से उनके द्वारा बसोर समाज के लिए किए गए उद्बोधन के अपमान जनक जाति सूचक शब्दों से उन्होंने अनुसूचित जाति / जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध किया है जो किसी धार्मिक संत को नहीं करना चाहिए क्योंकि धार्मिक संत सभी जातिगत समुदाय की धुरी होता है तथा उसे सभी जातियों के बीच में प्रेम व सद्भाव का संदेश देना चाहिए किन्तु धीरेन्द्र शास्त्री ने जो कृत्य किया है वह एक आपराधिक कृत्य है जबकि बसोर समाज एक मेहनतकश समाज है जो मेहनत व ईमानदारी के कारण अपना अस्तित्व समाज में बनाए हुए है तथा एक स्वाभिमानी समाज है भारत वर्ष में किसी जाति के साथ जाति का वर्ग भेद नहीं है। सभी जातियों के निवासी भारत के नागरिक है उनसे जातिगत भेद-भाव किया जाना भारत के संविधान में भी वर्जित है तथा उक्त कृत्य मौलिक अधिकारों का हनन है। इस तरह एक जिम्मेदार धार्मिक / मठाधीश होने का दावा करने वाले धीरेन्द्र शास्त्री द्वारा किए गए उक्त कृत्य के लिए उन्हें दण्डित किया जाना नितांत आवश्यक है ताकि सामाजिक भेद वाले तथा भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले व्यक्तियों पर लगाम लग सकेसंयुक्त बसोर समाज, मध्यप्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री है, आपका यह नैतिक दायित्व है कि सभी समाज के बीच भाईचारा बिना किसी जाति भेद के बना रहे तथा उक्त भावना का उल्लंघन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर प्रतिबंध लगाना आपकी प्राथमिकता सूची पर है। अतः आपसे बसोर समाज न्याय व सामाजिक समरसता कायम किए जाने की अपेक्षा रखता है तथा धीरेन्द्र शास्त्री द्वारा किए गए उपरोक्त आपराधिक कृत्य के लिए उनके विरूद्ध निम्न कार्यवाही अविलम्ब किए जाने की मांग करती है,धीरेन्द्र शास्त्री के विरुद्ध सार्वजनिक सभा में बसोर समाज के विरूद्ध जाति सूचक शब्द का उद्बोधन करने के अपराध में उनके विरूद्ध तत्काल कार्यवाही की जाये तथा आपराधिक मामला पंजीबद्ध कर F.I.R. दर्ज की जाये, धीरेन्द्र शास्त्री को तत्काल गिरफ्तार किया जावे, धीरेन्द्र शास्त्री के विरूद्ध सार्वजनिक सभा में जातिय भेदभाव उत्पन्न कर जातियों के बीच में मतभेद व द्वेषभाव व ऊँच-नीच के तुलनात्मक उद्बोधन तथा नारी शक्ति के विरुद्ध भी किए गए अपशब्दों के कारण सामाजिक संरचना को दूषित करने वाले ऐसे स्वयंभू धार्मिक संत / मठाधीश के विरूद्ध उनकी सामाजिक सभाओं को पूर्णतः प्रतिबंधित कर उनके विरूद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम की भी कार्यवाही की जावे तथा धीरेन्द्र शास्त्री जैसे व्यक्तियों को संरक्षण देने वाले प्रभावशाली व्यक्तियों पर भी समाजहित में कार्यवाही की जावे।संयुक्त बसोर समाज यह ज्ञापन हजारों की संख्या में उपस्थित जब समुदाय के साथ आपसे न्याय पाने की आशा से प्रस्तुत कर रही है तथा समाज आपसे विनम्र प्रार्थना करती है कि इस ज्ञापन के प्राप्ति के 15 दिवस के अंदर सामाजिक सद्भाव स्थापित करने हेतु दोषी धीरेन्द्र शास्त्री के विरूद्ध कार्यवाही कर सख्त न्यायिक प्रशासक तथा समाज में संव्यवहार बना रहे इस दिशा में कार्यवाही कर समाजहित में न्याय प्रदान करने की अपेक्षा करती है। यदि 15 दिवस के अंदर इस ज्ञापन पर आपके द्वारा उचित कार्यवाही न की गई तो विवश होकर बसोर समाज को अपने स्वाभिमान व सम्मान की रक्षा हेतु प्रजातांत्रिक ढंग से उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ेगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन पर होगी, शांतिपूर्ण रैली में आऐ सभी बसोर समाज के महिला पुरूष कार्यकर्त्तागण एवं अशोक कुमार बेन,गुलशन बेन, संतोष बेन, महिपाल वंशकार, तानिया वंशकार चरण लाल बेन शंकर बेन शैलेंद्र वंशकार कौशल बेन,प्रभु दास सोनवाहा, संतोष ओरेहा, राजेंद्र बंसल, दीपक बेन, एस एल खड़ेतिया, प्रीति बेन, पवन बेन, प्रमोद बेन, विजय बेन, आदि सैकड़ो की संख्या में बसोर समाज के लोग उपस्थित रहे ।

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