दुख में भी सुखी जीवन जीने की सीख देते हैं श्रीकृष्ण

जबलपुर दर्पण। काशी कुंज कॉलोनी, साईं आटो मित्र के पीछे ग्वारीघाट रोड पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस वृंदावन धाम से पधारे कथा वाचक पं. शिवम शुक्ल जी महाराज ने प्रहलाद चरित्र, वामन चरित्र, श्रीराम जन्मोत्सव एवं श्रीकृष्ण जन्म की कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण का जन्म जेल में हुआ था। फिर भी वे माया से प्रेरित होकर गोकूल पहुंच गए। नंद बाब के घर जन्मोत्सव की खुशियां मनाई गईं। उन्होंने भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान मनुष्य योनी में जन्म लेकर दुख: में भी सुखी जीवन जीने की सीख देते है। महाराज श्री ने भगवान श्री राम के जन्म का व्याख्यान करते हुए कहा कि भगवान श्री राम अयोध्या नरेश दशरथ के यहाँ जन्म लिया था। इसके बावजूद वे शालीनता, नम्रता और मर्यादा पुरुषोत्म कहलाते है। वे 14 वर्ष तक जंगलों में भटके। फिर भी उन्हें अभिमान नहीं था। मनुष्य के पास थोडा सा धन आने के बाद अभिमानी बन जाता है।
नंद के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान सोहर गीतों पर श्रद्धालु भाव विभोर होकर खूब नाचे। नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की गीत पर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। बालक बने श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े। व्यासपीठ का पूजन आयोजन अशोक अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल, ज्ञान अग्रवाल, शैलेष अग्रवाल, आशुतोष अग्रवाल, अरविंद अग्रवाल, अजय अग्रवाल, अखिलेश अग्रवाल, अनुभव अग्रवाल आदि ने किया। साथ ही आनंद भैरवे, मधुसुदन दुबे, राजेश अग्रवाल, शैलेश गुरु, अनिरुद्ध पड़राहा, सुकेश घोष, कैलाश अग्रवाल, यशपाल जैन आदि आगंतुक ने आज की भागवत कथा का रसपान किया।



