जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

जीवन में ताप -वेदना के साथ आनंद ही शिव संदेशः स्वामी नरसिंह दास

जबलपुर दर्पण। भगवान शिव का स्वरूप देखने में बड़ा ही प्रतीकात्मक और संदेशप्रद है।भगवान शिव के हाथों में त्रिशूल दैहिक,दैविक और भौतिक तीनों तापों का प्रतीक है।भगवान शिव के हाथों में केवल त्रिशूल ही नहीं है अपितु जो त्रिशूल है,उसमें भी डमरू बँधा हुआ है।त्रिशूल वेदना का तो डमरू आनंद का प्रतीक है।जीवन ऐसा ही है,यहाँ वेदना तो है ही मगर आनंद भी कम नहीं है।
आज आदमी अपनी वेदनाओं से ही इतना ग्रस्त रहता है,कि आनंद उसके लिए एक काल्पनिक वस्तु मात्र रह गई है।दु:खों से ग्रस्त होना यह अपने हाथों में नहीं मगर दुःखों से त्रस्त होना यह अवश्य अपने हाथों में है।भगवान शिव के हाथों में त्रिशूल और उसके ऊपर लगा डमरू हमें इस बात का संदेश देते हैं कि भले ही त्रिशूल रुपी तीनों तापों से तुम ग्रस्त हों मगर डमरू रुपी आनंद भी साथ होगा तो फिर नीरस जीवन भी उमंग और उत्साह से भर जाएगा
उक्त उद्गार श्रावण गुरु प्रदोष की श्री नर्मदेश्वर महादेव का महा रूद्राभिषेक, षोडशोपचार पूजन में नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज में श्री नरसिंहपीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नरसिंह दास जी महाराज ने कहे भगवान आदिदेव नर्मेदेश्वर महादेव का शमीपत्र ,आक, धतूरा रजनीगंधा, गुलाब, गेंदा अपराजिता, मोगरा ,चंपा के फूलों, बिल्वपत्रों से श्रृंगार किया
श्रावण मास महोत्सव के अवसर पर आज की अभिषेक में प्रतिभा विध्येश भापकर, अंजना मनीष अग्रहरि,निधि मिश्रा, नम्रता, दर्शना, सुधा मिश्रा,रामजी पुजारी लालमणि मिश्रा. प्रवीण चतुर्वेदी. संदीप मिश्रा. हरीओम. संदीप, अमित सुनील सहित भक्त जनों की उपस्थिति में पूजन. आचार्य रामफल शास्त्री,कामता महाराज , हिमांशु प्रियांशु ने संपन्न कराया ।
श्रावण मास महोत्सव में नरसिंह मंदिर में नर्मेदेश्वर महादेव जी का प्रतिदिन सुबह 9 बजे से रुद्राभिषेक पूजन अर्चन में सभी भक्तों से उपस्थिति का आग्रह हैं ।

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