उमरिया दर्पणमध्य प्रदेश

ब्रह्माकुमारीज की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती,, मम्मा,, का स्मृति दिवस मनाया

उमरिया। मम्मा को याद कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया बीके लक्ष्मी बहन उमरिया,,, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती मम्मा का 55 वा पुण्य स्मृति दिवस मुख्यालय स्थित शांति मार्ग ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय ,,ब्रह्माकुमारी आश्रम,, में मनाया गया इस दौरान केन्द्र प्रभारी राजयोगनी ब्रह्माकुमारी लक्ष्मी बहन सहित भाई बहनों एवं माताओं ने मम्मा के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके संस्मरण याद कर भोग लगाया गया। ब्रह्माकुमारी लक्ष्मी दीदी ने बताया कि ब्रह्माकुमारी संस्थान की मुख्य प्रशासिका मम्मा का जन्म 1919 में पंजाब के अमृतसर में हुआ था उनके बचपन का नाम राधे था मम्मा के पिताजी का नाम पोखर दास और माता जी का नाम रोजा था पिता का घर में सोने चांदी का व्यापार था देसी घी के थोक व्यापारी थे राधे में बचपन से ही भक्ति के संस्कार होने के साथ संगीत में विशेष रूचि थी पिताजी के निधन के बाद उनकी मां और बहन अमृतसर में हैदराबाद सिंध अपनी नानी और मामा के घर आ गई यहां वह ओम मंडली ब्रह्मा कुमारीज का पहले यही नाम था के संपर्क में आए विद्यार्थी जीवन में राधे पढ़ाई में होशियार होने के साथ गीत संगीत और नृत्य कला में विशेष पारंगत थी स्कूल में होने वाली प्रत्येक स्पर्धा में मम्मा आगे रहती जब वह 17 साल की थी तो अपनी मां के साथ ओम मंडली में आने लगी राधे जब ध्यान में बैठती तो खो जाती बहुत ही कम समय में उन्होंने ज्ञान योग और तपस्या से खुद को इतना शक्तिशाली बना लिया था कि उनके संपर्क में आने वाली हर एक व्यक्ति को अनुभूति होती थी राधे की लगन और त्याग तपस्या को देखते हुए संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने उन्हें इस इस यज्ञ की बागडोर सौंप दी साथ ही राधे को अलौकिक नाम दिया मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती जिन्हें सभी मुंह से वह प्रेम से मम्मा पुकारते थे 24 जून 1965 को मम्मा अपना भौतिक शरीर छोड़कर अव्यक्त हो गई उन्होंने कहा कि कितनी भी विकट परिस्थितियों पर मम्मा के चेहरे पर कभी शिकन देखने को नहीं मिली वह हमेशा कहती थी हर घड़ी को आखरी घड़ी समझो हुक्मी हुकुम चला रहा है मम्मा की पवित्रता सरल स्वभाव हर्षित मुक्ता नम्रता सबके साथ मिल जुलकर रहना आदि को उनमें कूट-कूट भरे थे यही कारण है कि उन्होंने कम समय में इस ईश्वरी विश्वविद्यालय के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया और लोग जुड़ते गए बी के बहन जी ने सभी को मम्मा के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प कराया वह विशेष योग किया गया साथ ही बाबा को भोग प्रसाद स्वीकार कराया गया वह सभी ने ब्रह्माभोज को स्वीकार किया।

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