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विषम परिस्थितियों में सरकार ने चिकित्सा बजट कम किया।

इससे सरकार की संवेदनशीलता उजागर होती है टीकाराम कोष्टा

जबलपुर – राज्य सरकार ने चिकित्सा और शिक्षा के बजट में कमी की है। इससे सरकार की असंवेदनशीलता का पता चलता है। चिकित्सा की आवश्यकता सर्वाधिक है इस क्षेत्र में बजट बढ़ाने की आवश्यकता थी। किंतु बजट कम कर दिया गया। चिकित्सा शिक्षाआयुष के बजट में कमी से नुकसान होगा। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता टीकाराम कोष्टा ने कहा कि पूरे देश मे जब कोरोना महामारी चरम पर है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार द्वारा विनियोग अध्यादेश के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं , चिकित्साशिक्षा, आयुष विभाग एवं निर्माण संबंधी खर्चों में ₹48 करोड़ की कमी की जाना कोरोना महामारी के रोकथाम के प्रति सरकार की असंवेदहीनता को उजागर कर रहा है ।
कोष्टा ने कहा कि प्रदेश में यह पहला मौका है जब प्रदेश कोरोना महामारी से जूझ रहा है । तब ऐसी स्थिति में प्रदेश सरकार द्वारा हर विभाग का 10 से 15% बजट विनियोग अध्यादेश के द्वारा कम कर दिया गया। जबकि समान परिस्थिति में हर वर्ष 12 से 15% की बढ़ोतरी होती रही। उपरोक्त निर्णय सरकार के कोरोना महामारी के रोकथाम के प्रति सजगता पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है ?
देश में कोरोना महामारी के कारण लगभग 80 दिनों के लॉक डाउन ने जहां व्यापारी, मजदूर, किसान रोज कमाकर खाने वालों की कमर तोड़ दी थी। ऐसी परिस्थिति में देश एवं प्रदेश की सरकारों ने इसकाआकलन गंभीरता से नहीं किया। कांग्रेस का आरोप है कि जब लोगों को पैसे की आवश्यकता है तब केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश सरकार को विगत 2 माह से आर्थिक मदद ना करने के कारण प्रदेश के 7 लाख कर्मचारियों को इंक्रीमेंट जो जुलाई माह से मिलता है । उस पर विराम लगा दिया गया। साथ ही इसके अलावा सातवें वेतन का डीए ,एरियर पर पहले ही रोक लगारखी है। बजट में कमी से बाजार की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी।

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