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तुलसी दास जयंती पर ई गोष्ठी संपन्न।

बुंदेली भाषा भी समृद्ध : डॉ. कृष्ण कांत चतुर्वेदी।



जबलपुर/अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के तत्वाधान में आज एक ई संगोष्ठी आयोजित की गई। गोस्वामी तुलसी दास जी की जयंती के अवसर पर उनके चित्र पर माल्यार्पण किया गया तथा विषय प्रवर्तन करते हुए संयोजक शरद अग्रवाल ने साहित्य परिषद् के माध्यम से क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों के संवर्धन के लिए गोष्ठियों के आयोजन की महत्ता पर विचार रखे। कार्यक्रम में प्रवीण गुगनानी(बैतूल), डॉ सरोज गुप्ता (सागर), डॉ बहादुर सिंह परमार(छतरपुर),अयोध्या प्रसाद कुमुद(उरई/उत्तरप्रदेश) ने बुन्देली भाषा ,संस्कृति और लोकजीवन पर सारगर्भित चर्चा की। अध्यक्ष की आसंदी से डॉ कृष्ण कांत चतुर्वेदी ने बुन्देली को देवभाषा संस्कृत और राष्ट्र भाषा हिन्दी के संदर्भ में में प्रकाश डालते हुये कहा कि बुंदेली भाषा भी सम्रद्ध है। उन्होंने कहा कि बुन्देली को अपने स्वर में बात करना चाहिए।इस ऑनलाइन विचार गोष्ठी में महाकोशल प्रान्त के 14 जिलों से 45 साहित्यकारों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन सुरेन्द्र सिंह पंवार ने तथा आभार प्रदर्शन पूरन चन्द्र गुप्ता (टीकमगढ़) ने किया। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पूर्णकालिक कार्यकर्ता एवं प्रांत सेवा प्रमुख योगेन्द्र सिंह योगी के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन धारण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए गोष्ठी का समापन किया गया।

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