ओबीसी हितों के लिए काम करे राज्य सरकार।

आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति बंद करें:टीकाराम कोष्टा
जबलपुर । राजनीतिक दलोंं की आपसी खींचतान का खामियाजा अक्सर आम जनता को भुगतना पड़ता है। मध्य प्रदेश मैं कांग्रेस की सरकार बनते ही मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कमलनाथ ने अनुसूचित जाति जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग की तरक्की और उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए अनेक कार्य किए थे । इसी क्रम में कांग्रेस सरकार ने मध्यप्रदेश लोकसेवा (अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए अराक्षण ) अधिनियम वर्ष 2019 में संशोधन कर पिछड़ा वर्ग के लिए शासकीय सेवाओं में अराक्षण का प्रतिशत 14 से बढा कर 27 %किया था। साथ ही साक्षात्कार एवं पदोन्नति समिति में भी अन्य प्रतिनिधि को रखना अवश्यक किया था ।कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता टीकाराम कोष्टा ने कहा कि उपरोक्त विषय को ले कर 18 जुलाई को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा । प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पूर्व की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि ओबीसी आरक्षण के मामले में कांग्रेस ने लापरवाही व उदासीनता बरती । कांग्रेस प्रवक्ता कोष्टा ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री और भाजपा अपने गिरेबान में झांक कर देखे । 15 वर्षों तक सत्ता सरकार में थे । ओबीसी वर्ग का होने का दावा करते रहे किन्तु भाजपा ने कभी ये प्रयास नहीं किए जब कमल नाथ की सरकार ने 14% को 27% अराक्षण देने का अधिनियम पास किया तो तो अन्य पार्टी से जुड़े ओबीसी के विरोधियों ने जो बड़ी चालाकी से उस पर रोक लगाने हेतु न्यायालय में आपत्ति लगा कर स्टे लेने का कार्य किया ।आज वही भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस की पिछली सरकार की उदासीनता का आरोप लगाकर पिछड़े वर्ग का हितेषी बनने का दावा कर रही है। यदि प्रदेश के मुख्यमंत्री सही में ओबीसी का हित चाहते हैं तो उच्च न्यायालय में सरकार का पक्ष ओबीसी के हित में रखने के निर्देश सुनिश्चित करें।और बेवजह में बेवजह के आरोप और प्रत्यारोप की राजनीति बंद करे ।
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