मध्य प्रदेशरीवा दर्पण

अनुभवी चिकित्सकों का गहराया संकट,मौत बनी मजाक

भाजपा की देन है  बदहाल संजय गांधी अस्पताल रीवा

रवि शंकर पाठक रीवा। सीधी जिले की झोली में सौगात मिलने के उपरांत पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के प्रयासों के कारण ही संजय गांधी अस्पताल की सौगात रीवा को नसीब हुई। कांग्रेस की विदाई के उपरांत भाजपा ने मध्य प्रदेश मे अपना दबदबा बना लिया। विंध्य प्रदेश में सबसे बड़ा अस्पताल जरुर दादा की वजह से रीवा को मिल गया पर उससे आम जनता को किसी तरह की राहत नसीब नहीं हुई। भाजपा शासनकाल में लगातार संजय गांधी अस्पताल में तैनात सीनियर चिकित्सकों का सागर मेडिकल कॉलेज भाजपा सरकार ने तबादला कर दिया। निरंतर इस अस्पताल से नियमित चिकित्सकों की विदाई होने कारण ही लगातार संजय गांधी अस्पताल बद से बद्तर हालात निर्मित हो गये हैं। पिछले पंद्रह सालों में भाजपा सरकार ने हमारे अपने विंध्य प्रदेश के एकमात्र बड़े संजय गांधी अस्पताल को मौत का अखाड़ा बना दिया। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर संजय गांधी अस्पताल को आगे नहीं बढ़ाया। लगातार अनुभवी चिकित्सकों की विदाई के कारण संजय गांधी अस्पताल बद से बद्तर हालातों के साये में सिमट कर रह गया है। कोरोनावायरस महामारी के बीच लगातार संजय गांधी अस्पताल में तमाम व्यवस्थाएं दम तोड़ रही हैं। कोरोना पाज़ीटिव मरीज के शव को लेकर जो बदलाव किया गया, उससे अचानक संजय गांधी अस्पताल में हंगामा खड़ा हो गया है। संजय गांधी अस्पताल में लंबे समय तक नेताओं और जनता का विरोध प्रर्दशन जारी रहा। भाजपा शासनकाल में संजय गांधी अस्पताल के अंदर बद से बद्तर हालात निर्मित हो गये हैं। यही वजह है कि इस समय दनादन मरने वालों की संख्या संजय गांधी अस्पताल में बढ़ती जा रही हैं। कोरोना संक्रमित का शव बदले जाने के उपरांत एक और चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब एक शिक्षक का शव संजय गांधी अस्पताल वालों ने बिना पीएम कराए ही परिजनों को सौंप दिया। लगातार विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े संजय गांधी अस्पताल में लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं और उसके बाद भी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी सरकार केवल तमाशा देखने तक सीमित रह गई है। विंध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी संजय गांधी अस्पताल में कोरोनावायरस महामारी के बीच भी लापरवाही के रिकॉर्ड लगातार बनाए जा रहे हैं, इसके बाद भी रिमही जनता के सबसे बड़े हमदर्द पूर्व मंत्री और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल तथा रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने अब तक हालातों को लेकर अपनी जुबान नहीं खोली है। क्या मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार है तो न्याय के लिए आवाज नहीं उठाई जाएगी? हैरान कर देने वाले दो सनसनीखेज मामले सामने आने के बाद रीवा जिला और पूरे विंध्य प्रदेश की भाजपा मौनीबाबा बनी हुई है। पिछले पंद्रह सालों में भाजपा सरकार ने जानबूझकर संजय गांधी अस्पताल को योग्य चिकित्सक विहीन कर दिया। जिसके कारण यहां पर आने वाले मरीजों के मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं लेता है। कोरोनावायरस महामारी के बीच भी संजय गांधी अस्पताल में मरीजों के लिहाज से हमेशा लापरवाही के मामले सामने आए हैं। पहले कोरोना पाजीटिव मरीज का शव बदला जाना और उसके बाद एक शिक्षक का शव बिना पोस्टमार्टम परिजनों को सौंप दिया। कोरोना संकमण के बीच संजय गांधी अस्पताल रीवा के मामले हर किसी को परेशान कर देते हैं। लगातार इस विंध्य प्रदेश के सबसे बड़े संजय गांधी अस्पताल में मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। उसके बाद भी रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा और विधायक राजेंद्र शुक्ल ने अपनी जुबान तक नहीं खोली है। क्या मध्य प्रदेश में जुगाड के सहारे चौथी बार सरकार बनाने वाली भाजपा सरकार के नेताओं की संवेदनाएं मर चुकी है या फिर सब भगवान भरोसे है। 

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