दमोह दर्पणमध्य प्रदेश

कोराना योद्धा की सच्ची कहानी

जब तक यह वायरस समाप्त नही हो जाता कर्तव्य पथ पर डटा रहूँगा- लेब टेक्नीशियन योगेश जाट

दमोह । वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का कहर देश भर में लगातार जारी है। इस संकट के दौर में कुछ योद्धा ऐसे भी सामने आए है। जिन्होंने जरा भी न घबराते हुए एक कुशल योद्धा की तरह डटकर संघर्ष पथ पर डटे रहने का संकल्प लिया है। जी हाँ एक ऐसी ही सच्ची कहानी और कोरोना योद्धा की जुबानी आज हम लेकर आये है। दरअसल दमोह खैराती अस्पताल में पदस्थ लैब टेक्नीशियन योगेश जाट ने बताया कि दमोह जिले में जब से कोरोना महामारी का आगाज हुआ है। मैं प्रारंभ से ही सैंपलिंग का कार्य कर रहा था, मन में संकल्प था कि जब तक हमारे देश और दमोह से कोरोनावायरस समाप्त नहीं होता है अनवरत कार्य करता रहूंगा। लोगो को कोरोना मुक्त करता रहूंगा। पिछले 4 माह मार्च से कोरोना सम्भावित मरीजो की सेम्प्लिग और जांच कार्य कर रहा हूँ एवं वायरस के इर्द-गिर्द ही रहना पड़ता था। अपनी ड्यूटी के दरम्यान अस्पताल परिसर मे नही रहा और घर पर ही सोशल डिस्टेंस एवं प्रोटोकाल का पालन करता रहा। परंतु 19 जुलाई की रात बडी ही भयाभय रात थी, उस रात तो कयामत ही आ गई थी क्योकि इतने अधिक पॉजिटिव केश पहले कभी नही आए थे और न ही आगे आने की सम्भावना है। मैने जैसे ही पीपीई किट पहनकर जांच कार्य प्रारंभ किया तो कोरोना के पॉजिटिव आना शुरु हो गया और क्रम अनवरत 12 घन्टे चलता रहा। मैने भी हार नही मानी और एक ही किट पहने पहने इस कार्य करता रहा। इस दौरान पानी पीने का समय नही मिला और न ही लघुशंका जाने का, मुझे कार्य के प्रति जुनून सवार था और वह कर दिखाया, रात्रि 8 बजे से सुबह 8 बजे तक 9 मरीजो की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई और 3 मरीजो की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई। उस रात के बाद सामान्यत ड्यूटी करता रहा और अपने घर मे ही सोशल डिस्टेंस का पालन करता रहा क्योकि मुझे डर था कि मेरे माध्यम से पत्नी और बच्चो को कोरोना न हो जाए। अचानक से किस्मत ने पलटी मारी और मुझे 22 जुलाई को सर्दी और बुखार आया, तब मैने अपने ही मर्जी से एंटीकोल्ड, एंटीएंटीबायोटिक्स और पेरासिटामोल की गोली खाई लेकिन फिर 23 जुलाई की सुबह मुझे सर्दी बुखार आ गया। तब मुझे सन्देह हुआ की कही मुझे कोरोना तो नही हो गया है। तब मेने अस्पताल जाकर कोरोना की जांच करवाई और रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। इतना सुनकर मै डरा नही, इससे भी जीतूँगा यह सोचकर घर से जाने लगा और जाते जाते मेरी धर्म पत्नी को बताया कि मुझे अस्पताल मे भर्ती होना है, थोड़ा सा हल्का सा कोरोना हुआ है। जो कुछ दिन मे ही ठीक हो जायगा। तुम बच्चो का अच्छे से ख्याल रखना और किसी की तकलीफ हो तो मेरे पास आ जाना।

कोरोना इलाज में भी आत्म निर्भर, बेड शीट धोने से लेकर सेनेटाइजिंग का कार्य किया

श्री जाट ने बताया कि जब वह कोविड अस्पताल मे भर्ती हुए परंतु वहाँ पर कुछ नही कर पा रहा था। जबकि मुझे समाज सेवा और राष्ट्र सेवा करना बहुत पसंद है। इसी भावना और संकल्प को लेकर मुझे कार्य मिल गया। मैने देखा कि सफाई कर्मचारी कोरोना वार्ड मे काम करने से डर रहे है, तो मैने ही सफाई करना चालू कर दिया और पूरा वार्ड सेनेटाइज किया। मुझे भी लगा की कार्य जयादा है और कर्मचारी कम है, तो मुझे उनकी मदद करना चाहिय। हमे पूर्णता सरकारी अमले पर निर्भर नही रहना चाहिये और सरकार कहाँ तक हर मरीज को सुविधा दे सकती है। मुझे भी हेल्थ वर्कर की मदद करना चाहिय। जिससे शासन खर्च भी कम आयेगा। यही बात सोचकर अस्पताल की बेडशीट चेंज नही कराई और स्वयं ही उसे धोने के साथ अपने कमरे की भी सफाई एवं धुलाई भी की। यहाँ तक मैने खुद अपना तापमान, पल्स, आक्सीजन चेक करता रहा। सिस्टर को बोल दिया था कि आप लोग जरुरत मन्द मरीजो को सेवाए दीजिए। मैने ये सब इसलिए किया। जिससे अन्य मरीजो को प्रेरणा मिले और इलाज भी आत्मनिर्भर रहकर कराने से बडी खुशी होती है।

श्री जाट ने बताया कि इस दौरान मैंने स्वस्थ्य जल्दी ठीक हो जाए, इसके लिये मैने सुबह और शाम को योग आसान और प्राणायम करना शुरु किया और सभी को व्यस्त रहने एवं आत्म निर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान मेने देखा कि वार्ड मे कई लोग नल चालू छोड़ देते, जिससे जल बर्बाद हो रहा था। उस पर भी अंकुश लगाया तथा दिन मे भी बल्ब ट्यूब लाईट जलती रहती थी इस तरह की लापरवाहियों पर भी रोक लगाई। कोरोना से जंग जीतकर घर लौटे लैब टेक्नीशियन योगेश जाट ने बताया कि कोरोना संक्रमित डरे नही बल्कि इसका पूरी हिम्मत के साथ सामना करे एवं कोविड केयर सेंटर में अगर स्ट्रेस फ्री रहना है तो स्वयं को व्यस्त रखने की कोशिश करे। में स्वस्थ्य होने के उपरांत अब शासन के नियम अनुसार होम कोरेन्टीन हूँ और उम्मीद कर रहा हूं कि जल्द ही होम कोरेनटाइन का समय निकल्क जाए ताकि में अपने कर्तव्य पथ पर जाकर पुनः कार्य कर सकूँ।

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