आखिर टेंट व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों के साथ नाइंसाफी क्यों?

आर्थिक विषमताओं को सहते हुए कारोबारी अब हैं भुखमरी की कगार पर।
जबलपुर। कोरोनावायरस की एक महामारी ने, पूरी दुनिया को एक साथ, जहां बेरोजगार कर दिया। वही कुछ लोगों पर हद से ज्यादा काम का बोझ लाद दिया।
लेकिन जो लोग कोरोनावायरस के चलते बेरोजगार हुए हैं। उनके काम धंधे बंद होते होते, आज चौपट होने की कगार पर हैं।
शादी और सामाजिक उत्सवों से जुड़े वे सभी कारोबारी, जो किसी एक उत्सव को सफल बनाते हैं। आज अपने हालात पर रोने के लिए मजबूर हैं।
प्रशासन कोरोना की विषम परिस्थितियों का हवाला देकर चुप्पी साधे बैठा है। जबकि आज हवाई यात्रा चालू है, रेल यात्रा चालू है, शराब की दुकानें खुली है, किराने की दुकान, जरूरत के सामान से जुड़ा हर कारोबार चालू हो गया है। बाजारों में भीड़ जबरदस्त है। फैक्ट्रियों का काम चालू हो गया है। राजनीतिक सभाएं हो रही हैं ,लेकिन लगता है प्रशासन यह मान कर बैठा है, कि कोरोनावायरस और समारोह के माध्यम से फैलेगा।
कुछ ऐसे ही आक्रोशित स्वर में आज मीडिया के सामने मुखातिब हुए। जबलपुर टेंट, लाइट, साउंड, फ्लावर, बारातघर, एलईडी, कलाकार, महासंघ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता।
मंचासीन पदाधिकारियों ने मीडिया के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपनी कुछ मांगे रखी। आगामी अक्टूबर-नवंबर से धार्मिक और वैवाहिक कार्यक्रम आरंभ होने जा रहे हैं।
इन कार्यक्रमों में लोगों को सम्मिलित होने की अनुमति प्रदान की जाए। ताकि इन उत्सवों से जुड़े सभी कारोबारियों और लोगों का रोजगार व्यवसाय दोबारा चालू हो सके।
शासकीय और अर्ध शासकीय मैदानों में काम करने की अनुमति दी जाए। जिससे मध्यम और सीमित संसाधनों वाले नागरिकों के आयोजन भी संभव हो पाए।
प्रशासन के द्वारा व्यापारियों के साथ अपराधियों की तरह व्यवहार किया जा रहा है। उनके ऊपर की जा रही धारा 107 /16 की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।
व्यापारीयों ने मांग की है कि कोरोनावायरस के चलते व्यापार पूरी तरह से खत्म हो चुका है। लेकिन खर्चे पहले की तरह लगे हुए हैं। बैंक का लोन, गोदाम का किराया, गाड़ियों की किस्त, कर्मचारियों का खर्च पूरा करना बड़ा मुश्किल हो रहा है। व्यापारियों को भी किसान क्रेडिट कार्ड की तरह सेवा प्रदाता क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी जाए।
सभी कारोबारियों को उद्योग का दर्जा देते हुए अनिवार्य सेवा के अंतर्गत मान्यता दी जाए।
संगठन के मंचासीन पदाधिकारियों में अशोक ओबराय, गुड्डा अग्रवाल, विकास गुप्ता, चंद्रकुमार लालवानी, संतोष केशवानी, सुरेंद्र दहिया उपस्थित रहे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महासंघ की तरफ से राजेश गुप्ता, राजू खालसा, जितेंद्र श्रीवास्तव, संजय झा, विकास मोदी, आशीष भट्ट, नवीन साहू, महेश बजाज, सुनील राय, शरद विश्वकर्मा, दीपक तिवारी, के एल जैसवाल उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से समय रहते उचित कार्यवाही करने की मांग की। यदि उनकी मांगों पर प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में आंदोलन की चेतावनी भी दी है।



