अतिथि शिक्षक आज से कर दिए नियमितीकरण के लिए ज्ञापन देना बंद

प्रदेश के 29 विधानसभा सीटों के उपचुनाव में सत्ता पक्ष का आज से शुरू ताबड़तोड़ विरोध,पर विपक्ष का भी नहीं करेंगे सपोर्ट,करेंगे विकल्प की तलाश
मण्डला। सरकारी स्कूलों में शिक्षकीय कार्य पर लंबे समय से रहे अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रक्रिया का अतिथि शिक्षक संगठन ने इंतजार करना आज से बंद कर सत्ता पक्ष का पुरजोर विरोध करना चालू करने का एलान कर दिया है। बताया गया है कि अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण की ओर सत्ता पक्ष का ध्यान तो जा ही नहीं रहा है,बल्कि इस मुद्दे को लेकर विपक्ष भी सरकार पर दबाव नहीं बना पा रही है।जिससे स्पष्ट होता है कि दोनों पार्टियां एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं।जो मिल-बांटकर प्रदेश को खोखला कर पूंजीपतियों और कारपोरेट घराने के हाथों बेचने को तुले हुए हैं।आधा प्रदेश तो बिक चुका है।शेष आधा बाकी पर भी इनकी नीयत खराब है।अतिथि शिक्षक समन्वय समिति मध्यप्रदेश के संस्थापक एवं मण्डला जिला संगठन के अध्यक्ष पी.डी.खैरवार ने जारी विज्ञप्ति में बताया है,कि अतिथि शिक्षक अब पूरी मानसिकता के साथ बीजेपी सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए उसके विरोध में मतदान करने उपचुनावों में काम करने तैयार हैं।29 उपचुनावी क्षेत्रों के अतिथि शिक्षकों को ऊर्जावान बनाने और साथ देने सभी जिलों के अतिथि शिक्षक उन क्षेत्रों में डेरा डाल कर भी सत्ता पक्ष के विरोध में जनमानस को जागरूक करने का काम करेंगे।संभावना है कि नवंबर के महीने में चंबल,ग्वालियर,मालवा तथा विंध्य क्षेत्र के 29 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं।जिसमें विपक्ष की भूमिका में खड़ी कांग्रेस पार्टी का भी सपोर्ट नहीं करने का निर्णय लिया है।क्योंकि छः महीने पहले डेढ़ साल तक कांग्रेस भी सत्ता में रहते हुए वचन पत्र पर लाकर नियमितीकरण की गारंटी देने के बाद भी कुछ नहीं कर सकी।जिसके चलते अतिथि शिक्षकों के मुददे का फायदा ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लेकर कांग्रेस की सरकार ही गिरा दिया और बीजेपी की सरकार बना दी।तब से छः महीने पूरे हो चुके हैं आज तक सिंधिया जी ने भी अतिथि शिक्षकों की माली हालत की ओर पलटकर नहीं देखा।जबकि इस दौरान अतिथि शिक्षकों के द्वारा आत्महत्या किये जाने का सिलसिला थम नहीं रहा है।अब तक 59 अतिथि शिक्षकों की मौत बेरोजगारी की तंगाई में आकर हो चुकी हैं।जिससे और भी अधिक रोष व्याप्त है।आगे बताया गया है कि अब प्रदेश के 29 विधानसभा क्षेत्रों में हाल ही में होने जा रहे उपचुनावों में इन क्षेत्रों के लगभग बीस हजार से अधिक अतिथि शिक्षक परिवार अपने लाखों रिश्तेदारों और शुभचिंतकों सहित निष्पक्ष और स्वतंत्र मतदान करने कोई विकल्प की तलाश कर रहे हैं।जिससे कि अतिथि शिक्षक परिवार की वोटिंग पावर का अंदाजा सत्ता की भूखी राजनीतिक पार्टियों को कराया जा सके।साथ ही आगामी समय में जो भी राजनीतिक पार्टी सत्ता पर आए सबसे पहले अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया लागू करने पर विचार कर सके।खैरवार ने सभी राजनीतिक पार्टियों पर आरोप लगाया है,कि मध्यप्रदेश में किसी भी पार्टी की सरकार रही बेरोजगारी कम करने के लिए रत्ती भर का काम नहीं करतीं।जिस कुविचार का शिकार होकर दिनों-दिन प्रदेश के लाखों बेरोजगार आत्महत्या करने तक को विवश होते जा रहे हैं।सभी जिला मुख्यालयों में करेंगे अनिश्चितकालीन हल्ला बोल प्रदर्शन,दो अक्टूबर से मण्डला में भी धरना चालू
उपचुनाव पूरे होते तक प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में अनिश्चितकालीन हल्ला बोल प्रदर्शन किये जायेंगे ,तथा उपचुनावी विधानसभा क्षेत्र मुख्यालयों में धरने दिये जायेंगे।जिससे कि उपचुनाव क्षेत्रों के मतदाताओं को शोषणकारी नीति चलाने वाली सत्ता की भूखी राजनीतिक पार्टियों की असलियत का संदेश पहुंचाया जा सके।इसके लिए कोरोनावायरस संक्रमण के गाइडलाइन का पालन करते हुए 2 अक्टूबर गांधी जयंती से मण्डला जिला मुख्यालय पर भी हल्ला बोल प्रदर्शन चालू किया जायेगा।जिले के समस्त अतिथि शिक्षकों से अपील की गई है कि मण्डला धरना में सामिल होने की सभी तैयारी कर लें। आचार संहिता लागू होते ही विकल्प का प्रचार-प्रसार और बीजेपी कांग्रेस की पोल खोल अभियान चलाने उपचुनावी क्षेत्रों का दौरा किये जाने भी कुछ अतिथि शिक्षकों को रवाना होना है।



