मध्य प्रदेशसतना दर्पण

पर्यावरण के दुश्मनों ने रच दी जीवन देने की मिसाल

पहले करते थे जंगलों का सफाया अब देते हैं लोगों को जीवन नहीं कटेंगे पेड कर रहे हैं जंगल की रक्षा

उचेहरा।पहाड़ी अंचल में महिलाओं का प्रमुख व्यवसाय जंगल से लकड़ी काटकर बाजार में बेचना था मगर अब इस अभियान में विराम लग गया है और पहले तो अगरबत्ती बनाने का काम चल रहा था मगर अब करोना काल में मास्क भी बनाए जा रहे हैं ।बता दें कि सतना जिले के उचेहरा क्षेत्र में गढोत पहाड़ी अंचल में पहले यहां आदिवासी महिलाएं जंगल से लकड़ी काटकर अपना जीवन यापन करती थी।
मगर अब इन्हें वन विभाग का सहारा मिला और इन्होंने व्यापक पैमाने पर अगरबत्ती बनाने का काम शुरू कर दिया ।बता दें कोरोना काल में जहां लोग जीवन और मौत से जूझ रहे थे वही यहां की आदिवासी महिलाओं ने वह मिसाल कायम कर दी जो नवाचार के साथ एक नई पहल है 2 दर्जन से अधिक महिलाएं किस पहाड़ी अंचल में मास्क बनाने का काम कर रही हैं ।बता दें कि अगरबत्ती केंद्र हो या कपड़े के सामान बनाने का स्तर मांस बनाने का काम हो इस पूरे काम में केंद्र प्रभारी रमाशंकर त्रिपाठी का सराहनीय योगदान हैबता दें कि यहां पर कई महिलाएं और आदिवासी लड़कियां मास्क बनाने के साथ-साथ घरेलू उपयोग के कपड़े भी बनाती हैं मगर अभी करोना काल में केवल मास्क ही बनाए जा रहे हैं ।बता दें कि उचेहरा में परस्मानिया अंचल के 16 ग्राम पंचायतें आदिवासी बहुल मानी जाती हैं और यहां पर मुख्य व्यवसाय जंगल से लकड़ियां काटना महुआ चार और चरवा बीनना ही प्रमुख व्यवसाय था।हालांकि बता दें कि यहां की आदिवासी जंगल से लकड़ियां नहीं काटते हैं लिहाजा वह महिलाएं सब अगरबत्ती बनाने और कपड़े की सामग्री बनाने में लगे हुए हैं इस तरह की पहल प्रदेश के अन्य आदिवासी इलाकों में भी की जानी चाहिए

इनका कहना है

मैं सिवनी से आकर यहां पर आदिवासी महिलाओं और लड़कियों को कपड़े के सामान बनाने का प्रशिक्षण दे रही हूं। हमारा एनजीओ चलता है उसी के माध्यम से यह कार्यक्रम चल रहा है।

मेम सरॉनिया

हम लोग यहां पर मास्क बनाने का काम कर रहे हैं क्रोना काल में जो बहुत ही आवश्यक काम है इसके बाद कपड़े के अन्य सामान भी बनाएंगे
हम लोगों ने प्रशिक्षण लेकर कपड़े के कई तरह के सामान बनाने लगे हैं खासकर लेडीज समान कई बना लेते हैं अभी क्रोना कार्य चल रहा है तो केवल मास्क ही बनाते हैं।

रोशनी प्रजापति

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