डिंडोरी दर्पणमध्य प्रदेश

मेरा घर मेरा पाठशाला का जिले में नहीं दिख रहा ज्यादातर असर

  • इंटरनेट व संसाधनों का बना अभाव
  • खानापूर्ति करने के लिए गांवों तक पहुंचते हैं शिक्षक

डिंडोरी। कोरोनावायरस की महामारी के बीच स्कूली बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लॉकडाउन के दौरान मेरी घर मेरी पाठशाला के तहत बच्चों को शिक्षा दिए जाने के निर्देश हैं, बावजूद अंचलों के दर्जनों गांवों में मेरी घर मेरी पाठशाला का ज्यादातर व्यापक असर नहीं दिख रहा। यही कारण है कि जिले के दर्जनों गांवों के बच्चे शिक्षा से वंचित हैं,आज भी अभिभावकों के पास संसाधन नहीं है और ना ही इंटरनेट कनेक्टिविटी गांवों तक नहीं पहुंच पाई है, जिससे डिजिटल तौर पर पढ़ाई का असर अंचलों में नहीं दिख रहा।

  • मुड़ियाकला में शिक्षकों की मनमानी

जिले के डिंडोरी जनपद अंतर्गत रैपुरा संकुल केन्द्र के प्राथमिक शाला मुड़िया कला मैं पदस्थ शिक्षकों की मनमानी आए दिन सामने आती ही रहती है, जहां ना तो समय पर शिक्षक स्कूल पहुंचते और ना ही मेरा घर, मेरा विद्यालय योजना को आगे बढ़ाने गांव में नहीं पहुंच रहे हैं। आरोप लगाया गया कि ग्रामीणों द्वारा कई बार शिकायत किए जाने के बाद भी जिम्मेदार शिक्षक के खिलाफ किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाई नहीं की गई ,जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों का भविष्य उज्जवल हो सके इसलिए बच्चों को स्कूल भेजते हैं,लेकिन स्कूल में पदस्थ शिक्षक अपने कर्तव्य से लापरवाही करने पर बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाता है, और बच्चे पढ़ाई लिखाई में कमजोर हो जाते हैं। गौरतलब है कि जिले में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए शासन द्वारा मेरा घर मेरा पाठशाला के तहत घरों में जाकर शिक्षक छात्र छात्राओं को पढ़ा लिखा रहे हैं, लेकिन डिजिटल युग में भी नेटवर्क की समस्या बनी हुई है तो कहीं संसाधन ही उपलब्ध नहीं है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page