अक्टूबर महीने में कांग्रेस करेगी जबरदस्त विरोध।

केंद्र द्वारा लाया गया किसान विरोधी बिल।
जबलपुर। किसानों की हालत सुधारने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और किसानों की बेहतरी की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वकांक्षी बिल पास कर उसे कानून का रूप दे दिया है। एक और जहां सरकार के नुमाइंदे इस बिल को किसानों के लिए एक ठोस कदम बता रहे हैं। वहीं विपक्ष इस बिल को किसान विरोधी साबित करने की कोशिश में है। हकीकत अभी भविष्य के गर्त में छुपी है। आने वाले समय में यह बात जाहिर हो जाएगी। कि बिल का प्रभाव किसानों की वर्तमान दशा पर सकारात्मक पड़ता है या नकारात्मक। हालांकि इस बिल का व्यापक रूप से विरोध भी शुरू हो गया है पंजाब, हरियाणा में विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं और अब जबलपुर में भी विरोध की आवाज उठने वाली है।
लेकिन इतना तो तय है कि इस बिल ने एक बार फिर, पक्ष और विपक्ष को एक बार फिर चुनावी दौर में नूरा कुश्ती का मौका दे दिया है।
ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कि अब तक केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए तकरीबन सभी कदमों का, संसद से पारित किए गए कानूनों का विपक्ष ने विरोध भी किया है। किंतु उसका यह विरोध केंद्र सरकार की मंशा में कोई परिवर्तन नहीं कर सका।
आगामी 2 अक्टूबर सरदार पटेल के जन्म दिवस है इंदिरा गांधी के शहादत दिवस 31 अक्टूबर तक किसान विरोधी बिल को लेकर कांग्रेस ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाली सभाओं में जाएगी और इस बिल के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर सरकार से इस बिल को वापस लेने की अपील की जाएगी। विपक्ष की यह योजना सराहनीय है कि वह जनता के हित को आगे रखकर उनकी बात करने जा रही है और उनके लिए संघर्ष करने जा रही है।
किसानों की इस लड़ाई को लड़ने के लिए राजीव गांधी पंचायत राज संगठन जबलपुर के संयोजक विवेक अवस्थी ने बताया कि 2 अक्टूबर का दिन महात्मा गांधी और सरदार पटेल दो महान हस्तियों का जन्म दिवस है। इस दिन से यह मुहिम चलाई जाएगी, घर-घर, गांव-गांव तक चौपालों में, इस बिल में मौजूद किसान विरोधी बातों को जनता तक पहुंचाया जाएगा और उन्हें समझाया जाएगा। एक पत्रकार वार्ता में बोलते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष राधेश्याम चौबे ने इस बिल को किसान विरोधी बताया है। साथ ही नगर अध्यक्ष दिनेश यादव ने इस बात का भरोसा दिलाया है कि, उनकी मुहिम रंग लाएगी और जनता को केंद्र सरकार की मंशा समझ में आएगी। इस अवसर पर मुकेश सोनी, मनीष पटेल, शर्मा मौजूद, राजाराम यादव रहे।



