गांधी जयंती पर गायत्री सरोवर में चलाया गया स्वच्छता अभियान

सरोवर से भारी मात्रा में निकाला गया कचरा एवं जलकुंभी
छतरपुर। आज पूरा देश महात्मा गांधी जी की जयंती को स्वच्छता दिवस के रूप में मना रहा है उसी क्रम में गायत्री सरोवर समिति के द्वारा नगर की धरोहर कहलाने बाले सरोवर (तालाबों) को बचाने के लिए गायत्री मंदिर स्थित गायत्री सरोवर में स्वच्छता अभियान चलाया गया इस अवसर पर समिति ने महात्मा गांधी के स्वच्छता के प्रति उनके विचारों को आत्मसात करते हुए इस अभियान की शुरुआत स्वच्छता अभियान के ब्रांड एंबेस्डर रहे डी डी तिवारी की उपस्थित में की गयी जिसमें गायत्री मंदिर के सामने बने घाट की साफ-सफाई की गई तथा सरोवर मैं फिर से पैदा हुई जलकुंभी को भारी मात्रा में सरोवर से निकाला गया।
इस मोके पर गायत्री सरोवर समिति के संयोजक गिरजा पाटकर ने महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर उनको याद करते हुए कहा की महात्मा गांधी जी ने अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था। उन्होंने “स्वच्छ भारत” का सपना देखा था जिसके लिए वह चाहते थे कि भारत के सभी नागरिक एक साथ मिलकर देश को स्वच्छ बनाने के लिए कार्य करें। महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के स्वप्न को पूरा करने के लिए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया और इसके सफल कार्यान्वयन हेतु भारत के सभी नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की।इस अभियान का उद्देश्य आने बाले वर्षों में स्वच्छ भारत का लक्ष्य प्राप्त करना है ताकि सफाई करने की दिशा मे श्रमदान के लिए लोग प्रेरित हो और अपने गांव शहर को स्वच्छ और सुंदर बना सके ।
तथा उन्होंने माननीय कलेक्टर महोदय एवं नगर पालिका सीएमओ से भी अपील की है कि गायत्री मंदिर के पास स्थित गायत्री सरोवर को साफ स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए इस सरोवर की ओर अपना ध्यान आकर्षित करे एवं गंदे नाले नालियों के प्रवाह को इस सरोवर से अलग कराने मैं अपना सहयोग प्रदान करे ।
इस अवसर पर गायत्री सरोवर समिति के महेंद्र अग्रवाल, डीडी तिवारी, गिरजा पाटकार, कुणाल राठीरिया, प्रदुम्न गुप्ता ,कैलाश वर्मा, भोलू अग्रवाल, डोबी पहारिया , आनंद शर्मा ,के एन सोमन ,विमला सोमन, निरंजन बाजपेई, भीमसेन ताम्रकार राकेश शर्मा, कमलेश,प्रेम राठीरिया, गणपत, रमेश यादव, बिरजू गोरेलाल सहित समिति के सदस्य उपस्थित रहे ।



