फर्जी डिप्लोमा लगाकर आज भी नौकरी कर रहे दर्जनों रोजगार सहायक

- पैसे की शह पर चंद दिनों में तैयार करवा लिए गए हैं, कंप्यूटर का डिप्लोमा
डिंडोरी ब्यूरो। जिले भर में ऐसे दर्जनों रोजगार सहायक मिल जाएंगे जो कम्प्यूटर का फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी कर रहे हैं। लेकिन इन रोजगार सहायकों के ऊपर कार्यवाही करने कोई पहल नहीं हो रही। आरोप है कि पैसे कि शह पर चंद दिनों में कंप्यूटर का फर्जी डिप्लोमा तैयार कर नौकरी हासिल किया गया। लेकिन इन रोजगार सहायकों को हटाने अभी तक कोई पहल जिम्मेदारों द्वारा नहीं की जा रही है।गौरतलब है कि जिले के दर्जनों रोजगार सहायकों ने ग्लोबल ओपन यूनिवर्सिटी नागालैंड का कंप्यूटर डिप्लोमा प्रमाण पत्र लगाकर रोजगार सहायक के पदों पर नौकरी हासिल किए गए है। जबकि मध्यप्रदेश शासन द्वारा यूजीसी से मान्यता प्राप्त कंप्यूटर डिप्लोमा को ही मान्य किए जाने के निर्देश थे, लेकिन कुछ आवेदकों द्वारा पैसे की शह पर चंद दिनों में कंप्यूटर का डिप्लोमा प्राप्त कर लिया गया और रोजगार सहायक की नौकरी हासिल कर ली गई।जबकि इन कंप्यूटर डिप्लोमा को मान्यता देने राज्य शासन के विज्ञप्ति में कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया।
- करवाई करने नहीं हो रही पहल
गौरतलब है कि राज्य शासन द्वारा साल 2009 में मनरेगा के कामों को ग्राम पंचायत स्तर पर सही क्रियान्वयन करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायतों में रोजगार सहायकों की भर्ती की गई थी, जिसमें राज्य शासन द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था से कंप्यूटर संचालन का पाठ्यक्रम उत्तीर्ण होना व 6 माह का अनुभव प्राप्त को प्राथमिकता देने विज्ञप्ति में उल्लेख गया था, लेकिन कुछ पंचायतों में नियमों को दरकिनार कर सांठगांठ करके फर्जी कंप्यूटर डिप्लोमा को सम्मिट कर नौकरी में रख लिया गया। बताया गया कि राज्य शासन के पत्र क्रमांक 3/11/08/03 दिनांक 12/06/2009 को मध्यप्रदेश शासन द्वारा विज्ञप्ति जारी कर रोजगार सहायकों को नियमानुसार भर्ती करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कुछ पंचायतों में मनमानी पूर्वक रोजगार सहायकों की भर्ती कर ली गई है।मामले को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं,लोगों ने जांच कराकर कार्यवाही करने की मांग की गई है।



