क्या अनुपपुर में पुनः शर्मसार होगा देश का लोकतंत्र ?

भाजपा सरकार के मंत्री का नोट बांटते वीडियो वायरल
शहडोल। पिछले छः सालों के दौरान हमारे देश में काफी कुछ बहुत तेजी से बदला है। वक्त ने अपने साथ नेताओं की फितरत को बुरी तरह प्रभावित किया है। भाजपा सरकार में शामिल मंत्री बिसाहूलाल साहू का एक चौंकाने वाला वीडियो वायरल हुआ है। अनुपपुर विधानसभा की किसी बस्ती में चुनाव प्रचार प्रसार करने के लिए नेताजी पहुंचे थे, अचानक भाजपा कैंडिडेट्स बिसाहूलाल साहू ने अपने हाथों में सौ रुपए वाली एक गड्डी ली और एक एक नोट लोगों के बीच बांटने लगे। नोट बांटकर जय जयकार करवाने वाले बिसाहूलाल साहू का वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी दलों ने भाजपा को निशाने पर लिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अनुपपुर में उपचुनाव के दौरान पुनः देश का लोकतंत्र शर्मसार हो जाएगा? अनुपपुर विधानसभा चुनाव 2018 में जनादेश ने कांग्रेस के कैंडिडेट बिसासूलाल साहू का साथ दिया था। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा पंद्रह माह की कांग्रेस सरकार में पूरी न होने के कारण बिसाहूलाल साहू ने एकदम से भगवा धारण कर लिया। अनुपपुर के जनादेश ने कांग्रेस को जिताया पर अफसोस खरीद फरोख्त के मायाजाल की वजह से चौथी बार जबरिया भाजपा ने अपनी सरकार बना डाली। नेताजी ने जनादेश और लोकतंत्र को ठेंगा दिखाते हुए निज स्वार्थ के वशीभूत होकर भाजपा का गमछा गले में डाल लिया। आगामी तीन नवंबर 2020 को अनुपपुर सहित 28 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। सवाल आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। क्या इस उपचुनाव में पुनः देश का लोकतंत्र, नोटतंत्र के आगे शर्मसार होगा। अनुपपुर विधानसभा में भाजपा कैंडिडेट का नोट बांटते हुए जो वीडियो वायरल हुआ है, उसे देखकर जरुर उपचुनाव में मताधिकार का इस्तेमाल करने वाले मतदाताओं को सोचना होगा। नोटतंत्र की मजबूती से ही लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई गई हैं। अनुपपुर विधानसभा के मतदाताओं को अब यह तय करना होगा कि मध्यप्रदेश के भावी भविष्य के लिए नोटतंत्र जरुरी है या लोकतंत्र?
भाजपा की सरकार बनवाने वालों को मिला है ईनाम
मध्य प्रदेश में 26 लाख से अधिक कर्जदार किसानों का कर्ज माफ करने वाली कमलनाथ सरकार को अपनों के कुनबे ने ही सत्ता के सिंहासन से उतारने का काम निज स्वार्थ के लिए किया है। अपने राजनैतिक कैरियर को लेकर पसोपेश में चल रहे ग्वालियर राजघराने के पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने 22 सर्मथक विधायकों से एक झटके में इस्तीफा दिलवाकर मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन करवा दिया। कांग्रेस सरकार से गद्दारी करने और चौथी बार भाजपा सरकार मध्य प्रदेश में बनवाने वाले हर एक बागी विधायक को 35-35 करोड़ रुपए का ईनाम दिया गया। सिंधिया की तरह अनुपपुर के विधायक बिसाहूलाल साहू ने भी राजनैतिक फायदा हासिल करने के लिए कांग्रेस का साथ मझधार में छोड़ना उचित समझा। उपचुनाव के लिए प्रचार प्रसार करने के दौरान भाजपा कैंडिडेट बिसाहूलाल साहू का पैसा बांटते हुए वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा सरकार और उसके बड़बोले नेताओं ने मौन धारण कर लिया है। निस्संदेह भाजपा की तरफ से अनुपपुर उपचुनाव के प्रभारी पूर्व मंत्री और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल के लिए भी वायरल वीडियो देखकर जवाब देना आसान नहीं होगा।
विकास पुरुष के लिए अग्नि परीक्षा है उपचुनाव
मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का बिगुल बज गया है। भाजपा सरकार पहले से ही अपना पूरा फोकस उपचुनाव वाली सीटों पर बनाए हुए है। जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बीडी शर्मा सहित सरकार और संगठन ग्वालियर चंबल संभाग की 27 सीटों पर पकड़ बनाए हुए है, वहीं विंध्य प्रदेश की एकमात्र सीट अनुपपुर का जिम्मा मुख्यमंत्री ने अपने विश्वासपात्र पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ल को सौंपा है। लगातार पूर्व मंत्री और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल अनुपपुर में मंडल, संगठन की बैठकें कर उपचुनाव की जीत के लिए मूलमंत्र दे रहे हैं। इस उपचुनाव में बिकाऊ और टिकाऊ भी बड़ा मुद्दा बन गया है। जिन हालातों में भाजपा ने 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव थोपें हैं, उससे आम मतदाता भी बखूबी परिचित हैं। भाजपा कैंडिडेट बिसाहूलाल साहू का पैसा बांटते हुए जो वीडियो वायरल हुआ है वह जरुर भाजपा की परेशानी बढ़ा सकता है। सीएम और भाजपा ने जिस तरह से रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल पर उपचुनाव के लिए भरोसा जताया है, उस वजह से अनुपपुर का चुनाव पूर्व मंत्री के लिए अग्नि परीक्षा माना जा रहा है।ओवर कांफिडेंस के घोड़े में सवार हैं भाजपा कैंडिडेट्स नोटतंत्र की ताकत दिखाकर भाजपा ने हमारे लोकतंत्र को जमींदोज करने का कारनामा किया है। मध्य प्रदेश में भाजपा ने चौथी बार अपनी सरकार नोटतंत्र के जरिए कैसे बनाई है, यह पूरा मध्य प्रदेश अच्छी तरह जानता है। भाजपा आलाकमान का तगड़ा मैनेजमेंट देखकर कांग्रेस से नाता तोड़कर भाजपा सरकार में मंत्री बनने वाले बागियों को पूरा भरोसा है कि जीत उन्हीं की होगी। यही वजह है कि सभी 28 विधानसभा सीटों पर खड़े किए गए भाजपा कैंडिडेट्स ओवर कांफिडेंस के घोड़े में सवार है। इन बागियों का मानना है कि जनता हमें जानती है, इसलिए हम कहीं भी रहें वह हमारा साथ देगी। आगामी तीन नवंबर को लोकतंत्र और नोटतंत्र के बीच रोचक मुकाबला मध्य प्रदेश की 28 सीटों पर होने वाला है, अब यह मतदाता ही तय करेगा कि उनके कीमती वोट को बेंचने वाला विधायक होना चाहिए या फिर लोकतंत्र पर आस्था रखने वाले को विधायक होना चाहिए। कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ अपनी टीम को साथ लेकर प्रत्येक सीट में मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं।



