नही दी जा रही सूचना अधिकार की जानकारी

शिक्षा विभाग द्वारा किया जा रहा है गुमराह
मण्डला। आदिवासी बाहुल्य जिला मण्डला के शासकीय विभागों मे शासन द्वारा दी गई राशि पर खुलकर पालीता लगया जा रहा है। यह आलम जिले के सभी विभागों मे है। इस संबंध मे अगर कोई सूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगता है तो विभागों द्वारा जानकारी छिपने की नियत से घुमराह पूर्वक पत्राचार किया जाता है। ताकि हो रहे भ्रष्टाचार को छिपाया जा सके। ऐसा ही एक मामला शिक्षा विभाग का समाने आया है ।
ये है मामला-शास.उच्च. माध्य.विद्या. क्रमांक-2 मण्डला से आर.टी.आई. कार्यकर्ता ने शाला प्रबंधन समिति (एस.एम.डी.सी.) के खाते मे बर्ष 2018-19 एवं 2019-20 मे शासन द्वारा दी गई राशि का आय-व्यय का ब्यौरा मांगा गया था। जिस पर कार्यालय प्राचार्य शास.उच्च. माध्य.विद्या. क्रमांक-2 द्वारा दिनांक 29/07/2020 को आरटीआई कार्यकर्ता को पत्र देकर अवगत कराया गया कि शासन नियमानुसार सूचना के अधिकार के तहत जानकारी प्रदान करने के संबंध मे आवश्यक मार्गदर्शन कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास मण्डला से चाहा गया है। वरिष्ठ कार्यालय से दिशा निर्देश प्राप्त होने पर आवश्यक कार्यवाही से आपको अवगत कराया आयेगा। इसके बाद पुनः प्राचार्य द्वारा आर.टी.आई. कार्यकर्ता को पत्र क्रमांक/ संकुल प्राचार्य/स्था./2020/260 दिनांक 25/09/2020 देकर अवगत कराया गया कि इस संबंध मे सहायक आयुक्त आदिवासी विकास मण्डला से पत्राचार एवं मौखिक चर्चा की गई तदनुसार आपको सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(J) अन्तर्गत सूचना जो व्यक्तिगत सूचना से संबंध रखती है अथवा और उसके प्रकटीकरण से किसी लोक गतिविधि अथवा लोकहित का कोई संबंध नहीं है अथवा जो व्यक्तिगत गोपनीयता/एकान्तता पर अपेक्षित/अवैध आक्रमण का कारण बनेगी जब तक कि केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी प्राधिकारी यथा स्थिति इस बात से संतुष्ट नहीं हो जाते है या उनका समाधान नही हो जाता है कि विशाल लोकहित मे ऐसी सूचना का प्रकटीकरण न्यायोचित है। अतः आपके द्वारा मांगी गई जानकारी लोकहित से कोई संबंध नही होने से जानकारी दिया जाना संभव नही है। जबकि यह जानकारी कोई व्यक्तिगत नहीं है और लोकहित से संबंध रखती है क्योंकि यह राशि शासन द्वारा दी गई है और विद्यालय के विद्यार्थियों से संबंधित है। इसलिए यह जानना जरुरी है की इस राशि का उपयोग कही मनमाने तारीके से तो नही किया गया । और राशि के खर्च मे पूरी पारदर्शिता रखी गई है या नहीं। इस तरह से प्राचार्य द्वारा भ्रामक एवं घुमराह करते हुए पत्र दिये जा रहे हैं। और जानकारी नही दी जा रही है। जबकि शासन द्वारा राशि जो छात्र/छात्राओं के अध्ययन की गुणवत्ता को सुधारने एवं सुविधा युक्त बनाने हेतु मुहैया कराया जाता है। यह राशि शाला मे अध्ययनरत बच्चों के हित को ध्यान मे रखते हुये। नियमतः शाला मे आवश्यकता के अनुसार पुस्तकें या प्रयोगशाला की सामग्री आदि शाला प्रबंधन समिति के प्रस्ताव लेने के बाद, निविदा का प्रकाशन कर या कोटेशन लेकर क्रय की जा सकती है। इस राशि के उपयोग मे कुछ अनियमितता का संदेश होने पर एक आम नागरिक को यह अधिकार की वह सूचना के अधिकार के तहत जानकारी ले सकता है। जब इस संबंध प्राचार्य से चर्चा की गई तो उन्होंने साफ कह दिया कि जैसा हमें वरिष्ठ कार्यालय से दिशा निर्देश मिले हैं वैसा ही पत्र जारी किया गया है।
निःसंदेह प्राचार्य द्वारा जानकारी न देना और पत्र देकर घुमराह करना एक बड़े संदेह को जन्म देता है । साथ ही स्पष्ट होता है की छात्र/छात्राओं के हित मे शासन द्वारा दी गई राशि मे जमकर पलीता लगाया गया है।
आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया की प्राचार्य द्वारा जानकारी न मिलने से परेशान हो कर प्रथम अपील मे जाना पड़ा। और यह उम्मीद है की प्रथम अपीलीय अधिकारी सूचना के अधिकार अधिनियम की पूरी पारदर्शिता रखते हुये संबंधित विभाग से जानकारी अवश्य दिलवाईगें।
अब देखना है कि प्रथम अपील जो प्राचार्य के वरिष्ठ कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास मण्डला के पास की गई है जिन्होंने प्राचार्य को दिशा निर्देश दिये हैं वे अब आरटीआई कार्यकर्ता को जानकारी दिलवाते है अथवा नही?



