मध्य प्रदेशसतना दर्पण

बिरला अस्पताल के प्रबंधन ने प्रसूता की छीन ली जिंदगी

बद से बद्तर हालात में किया रेफर, पति ने लगाए आरोप
जबलपुर दर्पण, सतना। बिरला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और डाक्टरों की मनमानी के कारण तीस वर्षीय भारती गुप्ता की जीवन लीला समाप्त हो गई। विंध्य प्रदेश में दम तोड़ती स्वास्थ्य सुविधाओं और मरीज के परिजनों से बेजा वसूली वाली व्यवस्था के कारण प्रदीप गुप्ता की जिंदगी ही उजड़ गई। लापरवाही में रिकॉर्ड बनाने वाले बहुचर्चित बिरला अस्पताल के बेलगाम प्रबंधन की वजह से तीस साल की भारती गुप्ता ने अपने पति और नवजात शिशुओं का साथ हमेशा के लिए छोड़ दिया। सतना जिले के सिंहपुर थाना अंतर्गत ग्राम सेमरिया निवासी प्रदीप गुप्ता अपनी पत्नी भारती गुप्ता को लेकर 7/10/2020 को सुबह 11.25 पर जिला चिकित्सालय सतना पहुंचे। दोपहर साढ़े बारह बजे डॉ पूजा सिंह ने मरीज को देखा। सोनोग्राफी सहित अन्य जांच कराते हुए एडमिट कराने की सलाह दी। दोपहर तीन बजे तक प्रदीप जिला अस्पताल में भटकते रहे पर सोनोग्राफी नहीं हो पाई। शाम पांच बजे प्रदीप गुप्ता अपनी पत्नी भारती को लेकर बिरला अस्पताल पहुंच गए। यहां पर डा मनीषा अग्रवाल ने मरीज को देखा। डॉ ने आपरेशन के लिए बोला। जब प्रदीप ने सोनोग्राफी के बारे में पूछा तो डा मनीषा अग्रवाल ने मना कर दिया। महिला डॉक्टर ने कहा कि डिलेवरी में कोई रिस्क नहीं है। परेशान पति ने बिरला अस्पताल की घोर लापरवाही पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग को लेकर एक ज्ञापन पत्र पुलिस अधीक्षक सतना को सौंपा है। प्रदीप गुप्ता ने बताया कि जब भारती की सोनोग्राफी 23/09/2020 को यूनिक डायग्नोस सेंटर एंड डेंटल क्लीनिक सतना में करवाई थी जिसकी रिपोर्ट के अनुसार डिलेवरी डेट 13/11/2020 थी। बिरला अस्पताल में डाक्टर मनीषा अग्रवाल से बार बार प्रदीप ने कहा कि सोनोग्राफी करवा लीजिए, लेकिन डॉ ने मना कर दिया। जब प्रदीप अपनी पत्नी को घर ले जाने के लिए आगे बढ़े तभी डॉ मनीषा ने अपने सहयोगी के साथ प्रसूता को ऊपर भेज दिया। वहीं प्रदीप को रसीदें कटवाने के लिए डॉ ने कहा। पत्नी को बिरला अस्पताल में एडमिट कर प्रदीप लेबर रूम ले गए। परेशान पति ने आरोप लगाया कि जबरिया भारी दबाव बनाकर कुछ फार्म सहित कोरे कागज में हस्ताक्षर करवा लिया गया। शाम सात बजे बिरला अस्पताल में भारती गुप्ता का आपरेशन शुरू हुआ। 7.14 पर पुत्र और 7.15 में पुत्री का जन्म हुआ। इन दोनों को बच्चों के डाक्टर सुनील अगिनहोत्री ने आपरेशन में अटेंड किया। एनीसथीसिया देने का काम डॉ इमरान खान ने किया। आपरेशन बाद नवजात शिशुओं का वजन कम होने की वजह बताकर डाक्टर ने प्रदीप को जल्द से जल्द किड्स क्रिटिकल केयर अस्पताल ले जाने को कहा। जबकि डॉ सुनील अगिनहोत्री ने बताया था कि बच्चों की हालत सामान्य है। बच्चों को संबंधित अस्पताल में एडमिट कराया गया, जहां डाक्टरों ने ने दोनों नवजात शिशुओं की हालत सामान्य बताई। इसी बीच डॉ मनीषा अग्रवाल ने प्रसूता को रात साढ़े आठ बजे जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया। कुछ ही समय बाद प्रसूता ने तेज सिरदर्द और उल्टी आने की शिकायत की। वार्ड अटेंनडेंट को जानकारी दी गई लेकिन उसने कोई एक्शन नहीं लिया ‌। जब हमने अधिकारियों से शिकायत करने के लिए कहा तो एक्शन लिया गया। पांच मिनट बाद वार्ड अटेंडेंट ने डाक्टरों को अवगत कराया। डाक्टरों ने देखकर रात दस बजे प्रसूता को आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। रात 11 बजे प्रदीप गुप्ता ने डॉ कंदर्प बुआ से भारती की हालत पूछी तो सब कंट्रोल में बताया गया। अगले 12 घंटे में सब रिकवहर हो जायेगा। प्रदीप ने डॉ कंदर्प से लगातार मरीज की हालत पूछी, यदि कोई दिक्कत हो तो प्रसूता को लेकर हम जबलपुर निकल जाएं। डॉ ने प्रदीप को भ्रमित किया और मरीज को कहीं न ले जाने की बात कही।

रात साढ़े 11 बजे भारती वेंटीलेटर पर थी
प्रदीप गुप्ता ने बताया कि रात साढ़े 11 बजे मेरी पत्नी वेंटीलेटर पर थी। तब वहां पर डा मनीषा अग्रवाल, डॉ इमरान, डॉ वेंकटेश अग्रवाल और डॉ कंदर्प मौजूद थे, तब एक बार फिर परेशान पति ने डाक्टरों से पूछा कि प्रसूता को बाहर इलाज के लिए ले जाने की आवश्यकता हो तो बताएं, तब सभी डाक्टरों ने एकमत से प्रदीप को रोक दिया। मरीज की हालत सामान्य बताई गई। पूरी रात प्रदीप जागते रहे, समय समय पर डाक्टरों से मरीज को बाहर ले जाने के लिए पूछते रहे। तब भी डाक्टरों ने मना कर दिया। पूरी रात दवाएं मंगाई गई। डाक्टरों ने बताया कि उल्टी होने के बाद वापस फेफड़ों में चली गई, जिसे साफ कर रहे हैं। अगले दिन सुबह जब डाक्टर राउंड पर आए तो प्रदीप ने अपनी पत्नी भारती की हालत पूछी तो जवाब मिला कि सब सामान्य है। दोपहर डेढ़ बजे तक बिरला अस्पताल के डाक्टर यही आश्वासन देते रहे। जैसे ही दोपहर के दो बजे तो तो डाक्टरों ने प्रदीप गुप्ता को बुलाकर कहा कि तुरंत वेंटीलेटर एम्बुलेंस बुलाएं, मरीज की हालत सीरियस है। न्यूरो सर्जन को दिखाने के लिए जबलपुर ले जाएं। हमारे संपर्क में कोई न्यूरोलॉजिस्ट नहीं है। डाक्टरों ने कहा कि मरीज को ब्रेन इंजुरी हो गई है। तत्काल रीवा से बीस हजार रुपए में वेंटीलेटर एम्बुलेंस बुलवाया गया। शाम चार बजे रेफर लेटर के साथ बिरला अस्पताल के डाक्टरों ने मरीज को जबलपुर के लिए रेफर कर दिया।प्रदीप गुप्ता ने बताया कि सतना से जबलपुर जाते समय मेरी पत्नी भारती को 25-30 इंजेक्शन आईबी पुश किए गए। बद से बद्तर हालत में मरीज को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर में रात 9.45 पर एडमिट कराया गया। यहां पर डाक्टरों ने रात साढ़े दस बजे प्रसूता को पूर्ण मृत घोषित कर दिया। प्रदीप गुप्ता ने बताया कि जब हमने मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों को एम्बुलेंस में दिए गए इंजेक्शन और दवाइयां दिखाई तो उन्होंने बताया कि आपको धोखे में रखा गया, इन इंजेक्शनों की वजह से मरीज की पल्स और हार्ट बीट मानीटर पर दिखाई दे रही थी, जबकि मरीज के आर्गंस काम करना बंद कर चुके थे। प्रदीप गुप्ता ने आरोप लगाया है कि भारती की मृत्यू बिरला अस्पताल में ही हो गई थी। केवल बिरला अस्पताल प्रबंधन ने अपनी लापरवाही छिपाने के उद्देश्य से मुझे एम्बुलेंस से जबलपुर रवाना कर दिया। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से डा मनीषा अग्रवाल, डॉ कंदर्प सहित अन्य के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला पंजीबद्ध करने की मांग की है।

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