अब गोबर बिकेगा 200 रुपया किलो

गोबर से बने दिए,मूर्ती व अन्य सामग्री होंगे बाजार में चाइना उत्पाद को टक्कर देगा गाय का गोबर

बालाघाट ब्यूरो। एक तरफ कोरोना संक्रमण का काल और दूसरी ओर पड़ोसी देश चीन से बिगड़ते रिश्तों के कारण चाइना उत्पादों का बहिष्कार भी देश मे तेजी से हो रहा है वंही अब चाइना उत्पादों को टक्कर देने और रोजगार के नजरिये से गोबर से सामग्रियों को बनाने का सफल प्रयोग कारगर साबित हो रहा है।गोबर से दिए,प्रतिमा समेत अन्य निर्माण सामग्री के चलते अब गाय के गोबर की कीमत 150 रुपये से लेकर 200 रुपये प्रति किलो पड़ रही है।और इस काम को करने के लिए बालाघाट के इंजीनियर भुवन उर्फ बाबा उपवंशी ने कमर बांध ली है।
किसने सोचा था कि गोबर भी कभी डेढ़ सौ से दो सौ रुपये किलो तक बिकेगा लेकिन ये अब सच हो रहा है।बालाघाट में कुछ स्थानों पर गोबर से सामग्रियों को तैयार करके उसे बाजार में उतार रहे है जिसमे गोबर से बने दिए , भगवान की मूर्ती, लुभान के स्टेण्ड,सहित अन्य कई सामग्री है जिसको बनाने की शुरुवात ग्राम पंचायत दिनी में स्थित अमृत गौशाला में किया जा रहा है जंहा बकायदा इंजीनियर भुवन उपवंशी के द्वारा सामग्रियों को बनाने के साथ साथ कई लोगो को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे है।यही नही इंजीनियर भुवन के द्वारा गोबर से सामग्रियों को तैयार करने के लिए पिपरझरी व अन्य गांव की समूह से जुड़ी महिलाओं को ट्रेनिंग भी दी जा रही है।और महिलाएं भी गांव में आसानी से उपलब्ध होने वाले गोबर से दिए,मूर्ती निर्माण और अन्य सामग्रियों को बनाने में खासी रुची दिखा रही है।वंही प्रारम्भिक दौर में गोबर से बनी सामग्रियों को लेकर लोगो मे भी दिलचस्पी देखी जा रही है।स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत के तहत गोबर से निर्मित सामग्रियों के प्रति लोगो का रुझान भी बढ़ रहा है।
अब धीरे धीरे गोबर से सामग्रियों के निर्माण का दायरा बढ़ते जा रहा है साथ ही निर्माण हो रहे गोबर की सामग्रियों की मांग भी बढ़ रही है ऐसे में गाय के गोबर से दिए,मूर्ती, घरेलू सजावटी आइटम बनाने के लिए गौशाला में महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि की बाजार में बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके बाकायदा इसके लिए पिपरझरी गांव में स्थित गौशाला में कार्य करने वाली समूह की महिलाओं को सामग्री निर्माण के लिए इंजीनियर भुवन उपवंशी के द्वारा प्रशिक्षित भी किया जा रहा है।
इस संबंध में खुद अमृत गौशाला चलकर गाय के गोबर से कई सामग्रियों के निर्माण का सफल प्रयोग करने वाले इंजीनियर भुवन उपवंशी ने बताया कि चाइना से बिगड़ते रिश्ते को देखते हुए अब अपने देश मे ही उपयोगी सामानों का निर्माण करने की आवश्यकता है ताकि सामान और उत्पादन के लिए चाइना या अन्य देशों पर निर्भर न रहे इससे हमारे देश मे रोजगार भी उप्लब्ध होगा और आत्मनिर्भर होने की दिशा में बेहतर परिणाम आएंगे।श्री उपवंशी ने आगे बताया कि गाय के गोबर को सुखाकर उसमे अन्य सामग्री को मिलने के बाद दिए,मूर्ति,जैसे सामग्रियों का निर्माण किया जाता है इस तरह गाय के एक किलो गोबर को आकार देकर 150 रुपये से लेकर 200 रुपये किलो तक बाजार में बेचते है गोबर से लगभग एक दर्जन से अधिक आइटम बनाने की सोच रहे है सबकुछ ठीक रहा तो बाजार की मांग के अनुरूप सामान उपलब्ध कराएंगे।उन्होंने आगे बताया कि गोबर के सामग्रियों की बालाघाट समेत अन्य जिले और पड़ोसी राज्यो में लाखों की संख्या में मांग है।यदि मांग के अनुरूप कार्य हुआ तो सैकड़ो हजारो खाली हाथो को रोजगार भी मिलेगा और इससे गौ संरक्षण भी यकीनन होगा।
इनका कहना है..
गाय के गोबर से भी कई प्रकार की सामग्रियों का निर्माण कर सकते है ये हमे प्रशिक्षण में पता चला है हमारे समूह के कई महिलाओं को रोजगार भी गांव में ही मिल गया है।
जयशीला वासनिक बुक कीपर
प्रज्ञाशील आजीविका स्व सहायता समूह
पिपरझरी
गाय के गोबर से 13 प्रकार की सामग्रीयो का निर्माण करना है अभी दिए ,प्रतिमा,व अन्य सामान बना रहे है अन्य जिलों व राज्यो से लाखों की डिमांड है।आने वाले वर्षों तक मांग के अनुरूप सामान उपलब्ध कराएंगे।कई समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है ।
इंजीनियर भुवन उर्फ बाबा उपवंशी
संचालक अमृत गौशाला ग्राम दिनी
गौशाला के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण देंगे ताकि अधिक से अधिक गोबर से सामग्री बन सके इसके अलावा गौशाला में और आय कैसे बढ़ाई जा सके इस पर भी कोशिश होगी गोबर से बने सामानों को ऑनलाइन मार्केट उपलब्ध कराएंगे।
दीपक आर्य
कलेक्टर बालाघाट



