एसडीएम के आश्वासन के बाद भी चरनोई भूमि से नहीं हटा कब्जा

लामबंद स्थानीय ग्रामीण कलेक्ट्रेट में कर चुके हैं प्रदर्शन।
डिंडोरी दर्पण ब्यूरो। एसडीएम के आश्वासन के बाद भी चरनोई भूमि से अवैध कब्जा हटाए जाने कोई पहल अभी तक नहीं की गई। गौरतलब है कि जिले के ग्राम पाटन में अनावेदकों द्वारा चरनोई भूमि पर अतिक्रमण करने के आरोप लगाकर लॉकडाउन में चरनोई भूमि पर मकान बनाए जाने के आरोप लगाते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है।ज्ञापन पत्र में उल्लेख किया गया कि पटवारी हल्का नम्बर 136 रा.नि. म.बम्हनी जिला डिंडोरी द्वारा प्रितिवेदन प्रस्तुत किया है, जिससे अनावेदक लल्लू पिता भद्दु लाल,रमेश पिता सम्मेलाल व सुंदर सिंह पिता शेरा सिंह सभी जाति चमार द्वारा ग्राम पाटन माल में स्थित भूमि ख.न.8 रकवा 0.110 हेक्टेयर मद चरनोई भूमि पर अनावेदकों द्वारा पक्का मकान का निर्माण किया जा रहा है, स्थानीय ग्रामीणों ने मामले को लेकर नायब तहसीलदार को मौखिक शिकायत की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। बताया गया कि नायब तहसीलदार समनापुर ने संज्ञान में लेते हुये म.प्र.भू. रा.संहिता 1959 की धारा 248 के प्रवधानों के तहत भूमि कबीजो को उक्त भूमि पर तत्काल कार्यवाही करते हुये कार्य बंद करने का आदेश दिया गया था।लेकिन इन दिनों लॉकडाउन में अनावेदक रमेश पिता सम्मेलाल निवासी सरई ,लल्लू पिता भद्दु लाल निवासी गाड़ासरई व सुंदर पिता शेरा सिंह निवासी गाड़ासरई द्वारा ग्राम के बहु उपयोगी शासकीय जमीन पर अतिक्रमण कर मकान बनाना एक बार फिर से शरू कर दिया है। आरोप है कि 22 अगस्त को स्थगन आदेश के बाद भी निर्माण कार्य शुरु कर दिया गया है, वर्तमान में तीन फीट ऊंचा दीवाल खड़ा कर लिया गया व शीट बिछा लिया गया है। ग्रामीणों ने अतिक्रमण हटाने के लिए कलेक्टर से मांग किये है।
- मनमानी पूर्वक बिना सहमति के किया गया है कब्जा।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अन आवेदकों द्वारा शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी व मामले में फंसाने की धमकी भी लगातार दी जा रही है। जिससे स्थानीय ग्रामीणों में डर का माहौल है और खुलकर शासन प्रशासन से शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं। कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए एसडीएम ने कहा है कि 7 दिन के अंदर चरनोई भूमि से अतिक्रमण हटा दिया जाएगा। लेकिन आश्वासन के हफ्तों बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा चरनोई की भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाए जाने कोई पहल नहीं की गई, जिसे लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।



