बीस किमी में 500 स्टोन क्रेशर, आवोहवा में घुला जहर

जिला खनिज विभाग के संरक्षण में अवैध संचालन संभव
रीवा दर्पण। विंध्य प्रदेश की धरती में पत्थरों की बहुलता राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान बन चुकी है। सीमेंट उद्योगों की रीवा, सतना और सीधी जिले में कई इकाइयां संचालित होती हैं। आम जनता के जीवन के साथ शासन प्रशासन जानबूझकर खिलवाड़ कर रहा है। केवल बीस किलोमीटर की दूरी में लगभग पांच सौ की संख्या में स्टोन क्रेशर्स संचालित कराए जा रहे हैं। जिसके कारण चालीस गांवों से अधिक क्षेत्र के लोगों के बीच सांस संबंधी बीमारी फैलती जा रही है। जिला प्रशासन और खनिज विभाग में तैनात जिम्मेदारों के सुनियोजित संरक्षण की वजह से आवोहवा में जहर घोलने का काम डंके की चोट पर किया जा रहा है। पत्थरों की अधिकता होने की वजह से विंध्य प्रदेश में उम्मीद से कहीं ज्यादा स्टोन क्रेशर संचालित होने लगे हैं। जिले के सीमाई इलाकों में संचालित होने वाली अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड बेला और जेपी सीमेंट लिमिटेड जेपी नगर रीवा के आसपास सबसे अधिक स्टोन क्रेशर का संचालन किया जा रहा है। जिला खनिज विभाग हमेशा की तरह आज भी साईंलेंड मोड़ में बना हुआ है, जिसके कारण स्टोन क्रेशर चलाने वालों की मनमानी थमने का नाम नहीं लेती। जब कभी वित्तीय वर्ष के अंतर्गत कागजी कोरम पूरा करने के लिए छुटभैये स्टोन क्रेशर संचालकों के खिलाफ अर्थदंड जैसी सामान्य कार्रवाई का सहारा लेकर शासन प्रशासन को सिर्फ गुमराह किया जाता है। रीवा जिले के ग्रामीण परिवेश वाले इलाकों में स्टोन क्रेशर की वजह से वातावरण बुरी तरह प्रदूषित हो चुका है। लिमिट से कहीं ज्यादा डस्ट वाले प्रदूषण की वजह से सांस संबंधी बीमारी लगातार फैलती जा रही है। बुजुर्ग लोगों के लिए हर समय मौजूद रहने वाला डस्ट का गुबार आसानी से अपना शिकार बना लेता है। रीवा जिले में बनकुइंया से बेला के बीच बीस किलोमीटर के एरिया में सबसे अधिक लगभग पांच सौ की संख्या में स्टोन क्रेशर संचालित है। आवोहवा को जहरीला बनाने का महाभियान डंके की चोट पर बीस किलोमीटर में चलाया जा रहा है।
जिले में यही एरिया अवैध स्टोन क्रेशर के लिए बदनाम
रीवा जिला भी अवैध और नियम विरुद्ध संचालित होने वाले स्टोन क्रेशर का बड़ा ठिकाना बन गया है। रीवा जिले के अंदर सबसे अधिक डस्ट का बोलबाला बनकुइंया से बेला के बीच देखा जाता है। आबादी के बीच सरहंग किस्म के लोगों का समूह स्टोन क्रेशर के जरिए सौगात में बीमारियां बांटने का काम करता है। बीस किलोमीटर के इस हिस्से में में पर्यावरण की हालत बद से बद्तर हो चुकी है, फिर भी जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कुछ नजर ही नहीं आता है। अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड और जेपी सीमेंट लिमिटेड से लगे ग्राम बैजनाथ, बेला, खमहरिया, महिदल, सोनरा, हिनौती, भोलगढ, छिजवार सहित अन्य गांवों में शासन के तय किए गए मापदंडों को जमींदोज करते हुए अधिकांश स्टोन क्रेशर का संचालन किया जाता है। इसी रीवा जिले में अवैध स्टोन क्रेशर संचालन के लिए बहुचर्चित बनकुइंया क्षेत्र में अकेले दो सैकड़ा से अधिक स्टोन क्रेशर संचालित होते हैं। बीस किलोमीटर की इस दूरी में दर्जनों ऐसे भी स्टोन क्रेशर संचालित हो रहे हैं जिनके पास किसी तरह की कोई परमीशन नहीं है फिर भी बेरोकटोक स्टोन क्रेशर चलवाया जा रहा है। इस इलाके से जिला खनिज विभाग को माहवार पैकेट में नजराना भेजा जाता है। इसलिए जिम्मेदार शासन प्रशासन को गुमराह करते हुए दोनों हाथों से ऊपरी कमाई करने में जुटे रहते हैं, उन्हें स्टोन क्रेशर के जहरीले गुबार से जनता को होने वाली समस्याएं कभी नजर ही नहीं आती है।
कहीं नहीं है बाउंड्री वॉल, सड़कों में नहा जाते हैं लोग
प्रशासन एक्सपर्ट बताते हैं कि स्टोन क्रेशर संचालन के लिए बकायदा आवश्यक मापदंडों को निर्धारित किया गया है, जिससे हमारे आसपास के पर्यावरण को बहुत ज्यादा नुकसान न होने पाएं? शासन के तय मापदंडों को शत प्रतिशत कागजों में पूरा करते हुए बराबर शासन को गुमराह किया जा रहा है। आबादी के आसपास स्टोन क्रेशर का संचालन नहीं किया जा सकता है। लेकिन रीवा जिले में बनकुइंया से बेला के मध्य बीस किलोमीटर एरिया में आबादी क्षेत्र को जानबूझकर अनदेखा किया जाता है। नियमानुसार स्टोन क्रेशर का संचालन करने वालों को चारों तरफ अच्छी हाइट वाली बाउंड्री वॉल का निर्माण कराना अति आवश्यक है, लेकिन बीस किलोमीटर में संचालित पांच सौ बेलगाम स्टोन क्रेशर्स में कोई एक भी ऐसा नहीं है जिसने डस्ट के गुबार को नियंत्रण में रखने के लिए जिम्मेदारी के साथ ऊंचाई वाली बाउंड्री वॉल का निर्माण करवाया हो। बनकुइंया, बैजनाथ, भोलगढ, छिजवार, महिदल, खमहरिया, सोनरा, हिनौती सहित अन्य गांवों में बिना बाउंड्री वॉल स्टोन क्रेशर का संचालन डंके की चोट पर किया जा रहा है। कुछ स्टोन क्रेशर में दिखावे के लिए बैसाखी वाली व्यवस्था जरुर देखने को मिलती है। यही वजह है कि बेला से बनकुइंया तक पहुंचने के लिए जिन सड़कों का निर्माण कराया गया है, वह पूरी तरह से जानलेवा डस्ट से सराबोर नजर आती है। किसी भी स्टोन क्रेशर में डस्ट को बैठाने के लिए पानी का छिड़काव नहीं करवाया जाता है।
राजनैतिक खिलाड़ियों ने अपना लिया है कारोबार?
प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि माइंस और स्टोन क्रेशर के कारोबार में प्रभावशाली राजनैतिक खिलाड़ियों की भूमिका भी असरदार हो गई है। राजनैतिक खिलाड़ियों की मजबूत घुसपैठ स्टोन क्रेशर कारोबार में बन गई है। रीवा जिले के बनकुइंया से बेला के बीच सबसे अधिक बेलगाम स्टोन क्रेशर्स संचालित होते हैं। राजनैतिक बिजनेसमैन हावी होने के कारण जिला प्रशासन और खनिज विभाग की भूमिका केवल कागजी घोड़े दौड़ाने तक सीमित रह गई है। केवल कागजी व्यवस्था अपडेट रखने के लिए ही जिला खनिज विभाग को सतर्क देखा जाता है। भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस पार्टी, बसपा सहित अन्य दूसरे राजनैतिक दलों से जुड़े दबंग लोगों ने एक नहीं बल्कि कई अवैध स्टोन क्रेशर संचालित कर रखे हैं। जिला खनिज अधिकारी पाण्डेय साहब को भला हमारे विंध्य प्रदेश में कौन नहीं जानता है। आफिस और बंगले में बैठ कर खनिज विभाग चलाने वाले अफसरों के सभी स्टोन क्रेशर संचालकों से घनिष्ठ संबंध कायम है, इस वजह से रीवा जिले में वित्तीय वर्ष के दौरान केवल राजस्व लक्ष्य प्राप्त करने के लिए ही कागजी खानापूर्ति को अमल में लाया जाता है। खनिज इंस्पेक्टर से लेकर तमाम अन्य अधिकारियों, बाबुओं सहित आला अधिकारी पाण्डेय को स्टोन क्रेशर्स संचालकों का समूह बराबर लक्ष्मी के मामले में मैनेज करता है। आवोहवा को जहरीला बनवाने में जिला खनिज विभाग की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका होती है।



