सरकार के विरुद्ध श्रमिक संगठन उतरे मैदान में।

मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ एमआर यूनियन ने भरी हुंकार।
जबलपुर। सरकार की नीतियों का विरोध और सड़क पर होने लगा है। श्रम कानूनों में बदलाव से लेकर सरकार देश के स्थापित ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन करने जा रही है। इस तरह के परिवर्तन से सभी कर्मचारी संगठनों में आक्रोश व्याप्त है। जहां एक और सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। वहीं दूसरी और श्रम कानूनों में बदलाव करके श्रमिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। इसके साथ ही पेंशन योजना में परिवर्तन करके कर्मचारियों के चौथे पन पर आघात करने का काम सरकार कर रही है। कुछ इस तरह के उद्गार हड़ताल में शामिल संगठनों द्वारा प्रस्तुत किए गए।
मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव यूनियन ने अपने मंच से सरकार के खिलाफ लड़ाई का बिगुल फूंक दिया।
सभी केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त आवाहन पर 26 नवंबर को हड़ताल की गई और सिविक सेंटर में 24 नवंबर को मशाल जुलूस भी निकाला गया था।
श्रम अधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 7 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा गया था। इन संगठनों की प्रमुख मांगे हैं जिसके तहत आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो और वैक्सीन बनाने के लिए सरकारी दवा कंपनियों को पुनर्जीवित किया जाए। दवा की कालाबाजारी पर रोक लगे। दवा के दाम कम किए जाएं। सेल्स प्रमोशन एक्ट 1976 को बहाल किया जाए। 8 घंटे की समय सीमा काम के लिए तय की जाए और सेल्स के नाम पर नौकरी से निकालना बंद किया जाए। साथ ही दवा और चिकित्सा उपकरणों पर जीएसटी ना लगे और एमआरपी की बजाय लागत मूल्य पर उत्पादन शुल्क लगाया जाए।
यूनियन के अध्यक्ष भानु सोनी और सचिव राजेश ओझा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
इस दौरान बैंकिंग सेक्टर ने भी हड़ताल में हिस्सा लिया और अपनी मांगों से संबंधित बातों को सामने रखा। पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने,निजी करण को रोकने लोन डिफाल्टर नो के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने जमा राशि पर ब्याज दर बढ़ाने जैसे कई मांगों को लेकर हड़ताल में हिस्सा लिया।



