कब तक बनी रहेगी विकास की मुख्य धारा से दूरी

.मण्डला जिले में समस्याओं का भारी अंबार, बेहोशी में जवाबदार
मण्डला। मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य मण्डला जिले में समस्याओं की कोई कमी नही है। यहां के नागरिक कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद शासन-प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। चोरों की बारात में जनवासा कौन ताके जैसी स्थिति मण्डला जिले में निर्मित हो गई है। नेता और नौकरशाह समस्याओं के निराकरण और विकास के गति आगे बढ़ाने में विशेष ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। यहीं वजह है कि आजादी के बाद से लेकर अभी तक यह जिला विकास की मुख्य धारा से नहीं जुड़ पाया है। सड़कों की हालात अत्यंत खस्ता है। निर्माण कार्यों में भारी धांधली चल रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य की स्थिति बेहद खराब हो गई है। शिशु पालना केंद्रों को अनुदान की राशि नहीं दी जा रही है एवं केंद्रों का संचालन पुन: शुरू नहीं किया जा रहा है। सरकार द्वारा अनुदान की राशि नहीं दी जा रही है, मिड डे मील के समूहों को पिछले शिक्षा सत्र की राशि नहीं दी जा रही है। आंगनवाड़ी के समूहों को परमिट जारी होने के बाद राशन नहीं दिया जा रहा है। धान खरीदी में भारी धांधली हो रही है अतिथि शिक्षकों को स्कूलों में पुन: काम नहीं दिया जा रहा है और न नियमित किया जा रहा है। साक्षर भारत मिशन के प्रेरकों को न तो नियमित किया जा रहा है और न कोई काम दिया जा रहा है ये काफी लम्बे समय से बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। बेरोजगारी, गंदगी, बीमारी, धांधली व निरक्षता इस जिले में चरम पर पहुंच गई है। आत्मनिर्भर भारत निर्माण से संबंधित कार्य इस जिले में नहीं हो रहे हैं। सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई, जनसमस्या निवारण शिविर फ्लॉप हो चुके हैं। समस्याओं का निराकरण ऐसे कार्यक्रमों से नहीं हो रहा है। इसके अलावा तमाम तरह की समस्याएं है जिनका निराकरण नहीं किया जा रहा है। नागरिकों की मांग है कि समस्याओं का निराकरण शीघ्र किया जावें।



