वनांचल क्षेत्र में गहराने लगा जल संकट, ठंड में भी पानी के लिये त्राही त्राही


मड़ियादो। शासन द्वारा हर वर्ष लाखो रुपये पंचायतो को पानी की सुविधा लोगो को उपलब्ध कराने के लिये दिये जाते है। जिससे जनता को गर्मी में होने वाली परेशानियों से निजात मिल सके लेकिन शासन से मिलने वाले फण्ड का पंचायतों द्वारा सही तरीको से उपयोग न होने के कारण हर वर्ष वही पानी का रोना बना रहता है और लोग अन्य कार्य छोड़कर पानी के लिये परेशान रहते देखे जा सकते है। इस वर्ष बारिश कम होने और सरपंच सचिव के मनमानी रवैये के कारण जंगली क्षेत्र में अभी से पानी की समस्या देखी जा रही है। जिसका स्थाई समाधान सरपंच सचिव द्वारा नही निकल जा रहा है। ऐसा ही मामला ग्राम पंचायत घोघरा में देखने को मिला। जहां पर पानी के लिये अभी ठंड से ही लोगो को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिसके चलते महिलाओं में हर रोज आपसी झगड़े की नोबत भी आ रही है। ज्ञात हो कि घोघरा ग्राम में करीब 700 लोग निवास करते है, जो पूर्णतया मजदूरी पर निर्भर है लेकिन पानी की परेशानी इनके लिये किसी अभिशाप से कम नही है। गांव में सिर्फ एक हांपम्प ही चालू है, गांव में एक ट्यूबवेल भी है, जो मोटर जल जाने की बजह से बंद पड़ा है। जिस कारण या तो हैंडपंप में सुबह से शाम तक लाइन लगाए रहो या करीब आधा किलोमीटर दूर 300 फुट नीचे घाटी उतारकर पानी लेकर आओ, ऐसी स्थिति में अधिकांश लोगों का दिन पानी की पूर्ति करने में ही व्यतीत हो रहा है। तब कही जाकर लोगो को पानी उपलब्ध हो पा रहा है। जिस कारण लोगो के मन मे सचिव व सरपंच के प्रति अत्यधिक गुस्सा है लेकिन इस सब के बाबजूद भी सरपंच सचिव लोगो की इस समस्या का स्थाई हाल नही निकल पा रहे है। इस संबंध में जब घोघरा सचिव देवी साहू से बात की तो उनका कहना है कि ये सही है कि घोघरा गांव की जनता पानी के लिये अत्यधिक परेशान है, करीब 15 दिन पूर्व पीएचई से मोटर लेकर आये थे, जो डलवाई थी लेकिन वह भी बोर में पानी कम होने के चलते जल गई है व हमारी पंचायत के खाते में 15 दिसम्बर से रोक लगी होने के कारण पंचायत के पास फण्ड नही होने के चलते पानी की समस्या से निजात हेतु कार्य नही कर पा रहे है। जिस कारण लोगो को पानी के लिये परेशान होना पड़ रहा है।



