अमानक दूध विक्रेताओं पर जुर्माना

जबलपुर दर्पण दमोह ब्यूरो
अपर कलेक्टर दमोह द्वारा अमानक दूध का विक्रय करने के अपराध में तीन प्रकरणों में सुनवाई एवं प्रस्तुत विवेचना के आधार पर दोषसिद्ध होने पर तीन दूध विक्रेताओं पर पांच-पांच हज़ार रूपये के मान से 15 हजार रूपये अर्थदंड की राशि अधिरोपित की है। अपर कलेक्टर एवं न्याय निर्णयन अधिकारी दमोह आनंद कोपरिहा ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 26 सहपाठित धारा 51 के तहत लिये गये निर्णय में अवमानक मिश्रित दूध का विक्रय करने के अपराध में दूध विक्रेता-मिल्क हॉकर कैलाश लोधी ग्राम ग्वारी दमोह को पाँच हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। जांच रिपोर्ट में अवमानक पाए गए मिश्रित दूध में एसएनएफ की मात्रा निर्धारित मात्रा 8.5 प्रतिशत के स्थान पर 7.7 प्रतिशत पाई गई थी। जो जांच रिपोर्ट में मिश्रित दूध अवमानक पाया गया था। एक अन्य प्रकरण में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 26 सहपाठित धारा 51 के तहत लिये गये निर्णय अवमानक भैंस का दूध के विक्रय करने के अपराध में दूध विक्रेता-मिल्क वेंडर रज्जू यादव निवासी-मारुताल दमोह पर पांच हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जांच रिपोर्ट में अवमानक भैंस के दूध में मिल्क फैट की मात्रा का प्रतिशत 2.4 प्रतिशत पाया गया था जबकि भैंस के दूध के लिए निर्धारित मानकों में मिल्क फैट की मात्रा 5 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए। इसी तरह एक अन्य प्रकरण में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 26 सहपाठित धारा 51 के तहत लिये गये निर्णय में अवमानक भैंस के दूध का विक्रय करने के अपराध में दूध विक्रेता-मिल्क वेंडर हीरालाल यादव निवासी-हथनी पिपरिया दमोह पर पांच हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जांच रिपोर्ट में अवमानक भैंस के दूध में मिल्क फैट की मात्रा का प्रतिशत 4.4 प्रतिशत पाया गया था जबकि भैंस के दूध के लिए निर्धारित मानकों में मिल्क फैट की मात्रा 5 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए एवं एसएनएफ की मात्रा 8.47 प्रतिशत पाई गई थी जबकि भैंस के दूध में एसएनएफ की मात्रा 9.0 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए। खाद्य सुरक्षा प्रशासन के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर अभिहित अधिकारी खाद्य सुरक्षा प्रशासन दमोह से विधिवत अभियोजन स्वीकृति पश्चात न्यायालयीन प्रकरण खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत अपर कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत किये थे।



