शंकर प्रसाद बर्मन ‘कलरिहा’ को साहित्यकारों ने दी श्रद्धांजलि

दिवंगत कवि शंकर प्रसाद बर्मन ‘कलरिहा’ को साहित्यकारों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया है । श्री बर्मन वातायन और हिंदी साहित्य सम्मेलन के सदस्य थे ।
शंकर प्रसाद बर्मन ‘कलरिहा’ की तबीयत अचानक खराब हुई और उन्हें इलाज के लिए नागपुर ले जाया गया था , जहां इलाज के दौरान ही ये पता चला कि वे कोरोना संक्रमित हैं । तमाम प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया नही जा सका और नागपुर में ही इलाज के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई ।
स्व. बर्मन साउथ ईस्टर्न कोल्क फील्ड्स लिमिटेड जोहिला की उमरिया कोयला खदान में टेलीफोन एवं रेडियो मैकेनिक के पद पर कार्यरत थे । प्रारंभ से ही वे साहित्यिक रुझान के व्यक्ति थे तथा साहित्यिक गतिविधियों में बढ़ चढ़कर भाग लेते थे । कोयला श्रमिकों के संघर्ष , समर्पण और अधिकारों पर आपने अत्यंत बेबाकी से कलम चलाया है । पाताल सेना एवं कोयला सुंदरी नाम से उनके 2 कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं । जबकि एक कहानी एवं गजल संग्रह के प्रकाशन की तैयारी चल रही थी। उनके असामयिक निधन पर हिंदी साहित्य सम्मेलन की उमरिया के अध्यक्ष संतोष कुमार द्विवेदी , सचिव राजकुमार महोबिया , वातायन के अध्यक्ष श्रीशचंद भट्ट , सचिव अनिल मिश्र , वरिष्ठ कवि रामनिहोर तिवारी, शंभू प्रसाद सोनी ‘ पागल’ , शेख धीरज , जगदीश पयासी, रामलखन सिंह चौहान , भूपेंद्र त्रिपाठी , शिवानंद पटेल , सत्येंद्र गौतम आदि ने शोक श्रद्धाजंलि व्यक्त की है ।



