जन स्वास्थ्य रक्षको के त्याग को भूला नहीं जा सकता – कमलेश सोनी।

गाडरवारा। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी ने समाज को बहुत सारे अनुभव व एहसास दिलाये। उन्ही में से ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था एक बुनियादी व अहम मुद्दा रहा । सम्पूर्ण लॉकडाउन जैसी परिस्थितियों लोगों को जहाँ घर से बाहर निकालना वर्जित था ,तब लोगों को छोटी – छोटी बीमारियों का भी सामना करना भी महंगा बल्कि असहज सा लग रहा था। ऐसी स्थिति में जन स्वास्थ्य रक्षको का लोगों का अपने पशिक्षण और अनुभव का लोकल टू वोकल फार्मूला ने बहुत साथ दिया। ग्रामीण जनता द्वारा उनके कार्यो को सराहा गया । लेकिन इसके ठीक विपरीत जन स्वास्थ्य रक्षकों का दुःख भी देखने मिला । उक्त विषय के सन्दर्भ में जन स्वास्थ्य रक्षक संगठन मध्यप्रदेश के वरिष्ठ प्रतिनिधि कमलेश सोनी ने बताया कि हमारी नियुक्ति प्रक्रिया गत सरकार ने प्रारंभ कि थी जिसके लिए लोक स्वास्थ्य संचालनय भोपाल द्वारा 11 दिसम्बर 2019 को मध्यप्रदेश के समस्त मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारियो पत्र जारी लिया था । जिसके तहत जन स्वास्थ्य रक्षकों का भौतिक सत्यापन होकर जिलों से सूची स्वास्थ्य संचालनय भोपाल को भेज दी गई थी । राजनैतिक घटनाक्रम के चलते सत्ता परिवर्तन हो गया । उसके बाद वर्तमान सरकार द्वारा कार्य को अगिम दिशा में परिवर्तित कर दिया गया । जिसके लिए जन स्वास्थ्य रक्षकों द्वारा मुख्यमंत्री शिवराजसिंह से बार बार गुहार लगा रहे है कि हमारी नियुक्ति प्रक्रिया को पूर्ण करते हुए जन स्वास्थ्य रक्षको ग्रामीण क्षेत्रों नियुक्ति किये जाये । ताकि गामीण प्राथमिक स्वास्थ्य में भी नया रूप मिल सकें। जन स्वास्थ्य रक्षकों ने इस कोरोना महामारी में अपनी जान हथेली पर लेकर जो कार्य किये है शायद उसके त्यागों को अस्मरणीय करना मुमकिन नहीं है।



