जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेशवायलर न्युज

न्याय की आस में भटक रहे हैं, सेना के पूर्व सूबेदार।

न्याय की आस में भटक रहे हैं, सेना के पूर्व सूबेदार।
एक साल बाद भी बेटे की मौत पर,नहीं मिला इंसाफ।
जबलपुर। कानून सबके लिए बराबर है, क्या यह केवल जुमला भर है? पुलिस के रवैए से निराश होकर,आम आदमी के पास, न्याय पाने का कौन सा रास्ता बचा है? जीवन के 30 साल देश की सरहद पर रहकर, रक्षा करने वाले, पूर्व सैनिक का बेटा, असमय ही काल के गाल में समा गया। एक दुर्घटना की तरह दिखने वाला यह कुकृत्य,स्वर्गीय आशुतोष के मोबाइल मिलने के बाद, उसकी हत्या की तरफ संकेत दे रहा है।
पिता अपनी बेचारगी पर हताश है। चीख चीख कर अपने बेटे के मोबाइल से निकली जानकारियां लेकर,पुलिस महकमे के चक्कर लगा रहा है। उसकी बात सुनकर, उस पर कार्यवाही करना तो दूर, पुलिस ने आज तक उनका मोबाइल लेकर, उसे देखना भी जरुरी नहीं समझा। मोबाइल के डाटा से मिली जानकारी के आधार पर। जब उन्होंने कोर्ट में आवेदन लगाया तो इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए कोर्ट ने पुलिस को आदेशित किया। लेकिन हकीकत के धरातल पर परिणाम अब भी शून्य हैं।

भारतीय थल सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार श्यामसुंदर चौबे ने, अपने इकलौते बेटे आशुतोष चौबे का विवाह,  गुलाबधर बढ़गंईया की बेटी, पल्लवी बढ़गंईया से की थी। जो कि समाधी रोड टिकरिया के निवासी हैं।
आशुतोष चौबे नरसिंहपुर के नजदीक एक्सिस बैंक में काम करते थे।
शादी के 1 साल बाद, एक बच्ची भी हुई थी। लेकिन दादा बनते ही,एक दिन उन्हें यह खबर आई। कि नरसिंहपुर से लौटते समय, उनके बेटे आशुतोष चौबे का एक्सीडेंट हो गया है।
वे मौके पर पहुंचे, अपने बेटे की ऐसी हालत देखकर बहुत ही व्यथित हुए।
आशुतोष की तेरहवीं के दिन अचानक उसके ससुराल वाले। अपनी बेटी और श्याम सुंदर चौबे की बहू पल्लवी को लेने के लिए पहुंच गए। दुख के इस दिन में उन्होंने,अपने समधी श्यामसुंदर चौबे के घर,मारपीट और हंगामा करते हुए, जबरदस्ती पल्लवी को, अपने साथ ले गए। कहा तो यह भी गया है कि पल्लवी, अपने सूटकेस में घर के सारे जेवरात और ₹60000 लेकर चली गई।
इसकी तत्काल शिकायत गोहलपुर थाने में की गई। धारा 294 के अंतर्गत इस अपराध को पंजीबद्ध करते हुए। पुलिस ने आज की स्थिति में चालान भी पेश कर दिया है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
लेकिन आशुतोष का मोबाइल लेकर जब श्यामसुंदर चौबे ने उसे देखा, तो मोबाइल की कॉल डिटेल, व्हाट्सएप चैट और सोशल मीडिया का डाटा निकालने पर, वह हैरान रह गए। जिस दौरान आशुतोष अपनी कार से नरसिंहपुर से, जबलपुर के लिए निकले थे। उसी दौरान उन्होंने पुलिस से कई बार मदद मांगी। साथ ही उनकी बहू पल्लवी के मैसेज भी उन्हें, संदिग्ध लगे जिसके आधार पर उन्हें यह महसूस हुआ। कि उनके बच्चे के साथ दुर्घटना नहीं घटी है। बल्कि सोची समझी साजिश के तहत उसकी हत्या हुई है।
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इस बात की जानकारी दी। साथ ही तेरहवीं के दिन मौके पर मौजूद किशोर सोनी ने भी इस बात की जानकारी मीडिया को दी। कि तेरहवीं वाले दिन लड़के के ससुराल वालों ने ना केवल हंगामा किया। बल्कि मारपीट करते हुए घर का सामान और जेवर समेत अपनी बेटी को ले गए। घर के सामने रहने वाली नगमा खान ने भी तेरहवीं वाले दिन के घटनाक्रम को मीडिया के सामने रखा।
श्यामसुंदर चौबे अपने इकलौते बेटे को अब भी न्याय दिलाने के लिए संघर्षरत हैं।

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