साहित्य दर्पण

आई मतवाली वर्षा ऋतु

बूँद-बूँद बरसती,

सरिता सागर बनती,
डाबरों के पानी में-
चिरैया छप-छप करती ।

बचपन हर्षित करती,
लहरों पे इठलाती,
कागज़ की कश्ती-
तूफ़ाँ से लड़ जाती ।

टप-टप छत टपकती,
घर में माँ बरतन भरती,
बच्चों की चिंता सताती,
आँसू पोंछ चूल्हा सुलगाती ।

वर्षा सबकी पीर हरती,
खुशियों से घर भरती,
चेहरों को खिलाकर-
ख़ुद क्यों उदास रहती ।

अवनि से व्योम मिल रहा,
मेघों संग दिनकर खेल रहा,
हाथ आती नहीं धूप-
सूरज ठेंगा बता रहा ।

मेघ निहारे श्यामल घटा,
प्रकृति बिखेरे अनुपम छटा,
वसुंधरा ओढ़े पीत वसन –
ज्यों भानु से जलद हटा ।

खेतों में फ़स्ल हरियाई,
चेहरों पे मुस्कान छाई,
सूरज खेले छुपमछाई,
धूप ऑंगन सुस्ताई ।

नलिन खोईवाल
376-A, सुदामा नगर,स्कॉलर्स एकेडमी स्कूल के सामने,
इंदौर 452009 मध्यप्रदेश

9993771730

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