साहित्य दर्पण

सावन

सावन का मौसम है आया,
सबके मन को भाया है।
रिमझिम रिमझिम वर्षा लाया,
सबका मन बहलाया है।

जब चम चम बिजली चमकी,
बदल ने शोर मचाया है।
सावन का मौसम है आया,
सबके मन को भाया है।

जब टप टप टपके पानी,
हम सबने छाता लगाया है।
झूले पड़ गए बागों में ,
मोरों ने नाच दिखाया है।

कितना सुंदर महीना देखो,
कोयल ने गीत सुनाया है।
काले बादल छा गए ऊपर,
खेतों ने मुसकाया है।

सौंधी खुशबू आई धरा से,
जब धरा ने पानी पाया है।
कितना प्यारा महिना सावन,
सबके मन को भाया है।

आते सब त्योहार खुशी के ,
सावन ही तो लाया है।
शिव शंकर का महीना है ये,
उन्हीं ने इसे सजाया है।

मिलती सारी सखियां इसमें,
सबने नाचा गया है।
सावन का महिना है आया,
सबके मन को भाया है।

✍🏻 राजेश्वरी मिश्रा
देवरा खुर्द (कटनी)
मध्य प्रदेश

 

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