साहित्य दर्पण

बरसात

(बाल गीत)

काले काले बादल आते ,
संग अपने वो मेघा लाते ।

रिमझिम बरखा की बूंदे ,
आकर नई फसल उगाते।

ग्रीष्म ऋतु की तपन मिटाते,
मौसम सुख में कर जाते।

फूलों की खुश्बू से देखो,
वातावरण को महका दे।

टिप-टिप गिरती बूंदे देखो,
मीठी सी एक धुन सुनाते।

कलरव करते पंछी भी ,
चाहो दिशा को है चहकाते।

बारिश के मौसम में अक्सर,
कागज की हम नाव बनाते हैं।

उसे बहा पानी में अक्सर,
हम बच्चे हैं खुश हो जाते।

घुमड़- घुमड़ कर बादल आते ,
संग आपने वो मेघ है लाते।।

©️®️पूनम शर्मा स्नेहिल ☯️

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