कांग्रेस ने नवरात्रि व ईद मिलादुन्नबी को लेकर की बैठक


जबलपुर दर्पण। कांग्रेस ने शिवराज सरकार को धर्म विरोधी सरकार बताया है। मध्य प्रदेश शासन के आदेशों की जानकारी आम जनता तक पहुंची की नवरात्रि पर्व पर रात्रि के 11:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक कर्फ्यू लगाया गया है। प्रतिमा विसर्जन के लिए अधिकतम 10 लोगों की संख्या तय की गई है। धार्मिक जुलूसो की अनुमति नहीं दी है तो जबलपुर की जनता ने अपना आक्रोश व्यक्त किया और शिवराज सरकार को धर्म विरोधी सरकार कहा। जिन्होंने धार्मिकता के सहारे सरकार बनाई वे ही अब धर्म विरोधी कार्य कर रहे हैं। आम जनता की भावनाओं को समझते हुए जबलपुर कांग्रेस कमेटी ने तत्काल रविवार को कांग्रेस कार्यालय में बैठक बुलाई।
बैठक में शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष दिनेश यादव, पूर्व मंत्री कौशल्या गोटिया, वरिष्ठ नेता सतीश उपाध्याय, अभिषेक चौकसे, मुकेश राठौर, झललेलाल जैन,मतीन अंसारी, ब्लॉक अध्यक्ष शिव कुमार चौबे, राजेंद्र पिल्ले, पूर्व पार्षद श्रीमती बलविंदर मान, भगत राम सिंह, विवेक अवस्थी, पीपी पटेल ,निर्मल चंद जैन, चमन पासी, मनोज नामदेव, रज्जू सराफ, टीकाराम कोस्टा, रिंकू तिवारी , मोहम्मद ताहिर खान, रामदास यादव, राजेन्द्र मिश्रा, आलोक गुप्ता, नेम सिंह, दीपक अग्रवाल ,शमीम अंसारी गुड्डू, अशरफ मंसूरी, श्रीमती खुर्शीद अंसारी, सुशीला कॉनॉजिया, मोहन रजक, पीपी पटेल अंबिका यादव , राजेश श्रीवास ,राजेश पटेल भारत कोस्टा ,आलोक गुप्ता, श्याम सोलंकी, रोहित यादव, राहुल तिवारी , अशरफ मंसूरी, मोबीन अंसारी, सोहने लाल कटारे, रज्जू सराफ, आशीष उसनेठे, अलीम मंसूरी,दिलीप पटरियां, हरि तिवारी, सुनील सोनी,गुड्डू नवी , राहुल तिवारी आदि ने निर्णय लिया कि भाजपा सरकार का यह तुगलकी फरमान वापस होना चाहिए। जिसे जबलपुर की जनता सिरे से नकार दिया है । जबलपुर अपनी धार्मिक मान्यताओं वह परंपराओं के कारण जाता है । जिसमें नवरात्रि पर्व ईद मिलादुन्नबी जैसे त्यौहार मनाए जाते हैं । पूर्व से मनाते आ रहे हैं। जब राजनीतिक कार्यक्रमों में कोई रोक नहीं है तो धार्मिक सामाजिक कार्यक्रमों पर रोक क्यों है ? क्या संक्रमण सिर्फ सामाजिक और धार्मिक आयोजनों से ही फैलता है? आम जनता शासन के बेतुकी आदेशों का पालन नहीं करेगी। संक्रमण से बचने के जो भी उपाय हैं उन सभी का ध्यान रखकर पालन करेगी। जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में शांति समिति की बैठक चल रही है। उन्हें शहर की भावनाओं से अवगत कराया जाए।
शांति समिति बैठक में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यह तुगलकी फरमान वापस लेने का पत्र नगर कांग्रेस के पदाधिकारियों के साथ पूर्व मंत्री चंदकुमार भनोट, विधायक संजय यादव, कदीर सोनी, गुलाम हुसेन उर्फ भूरे पहलवान, इकबाल, मकबूल की उपस्थिति में सौपा गया। नवरात्रि और ईद मिलादुन्नबी पर पाबंदी हटाई जाने की मांग की गई,
दिनेश यादव ने दो टूक शब्दों में कहा कि हम अपने त्यौहार अपनी आस्था और परंपराओं के साथ मनायेगे। नवरात्रि का पर्व सदियों से मां दुर्गा की आराधना के लिए है पंडालों वह मंदिरों में भक्तों के द्वारा रात्रि में ही परिवार के साथ दर्शन की परंपरा है । सुबह 4:00 बजे से माताएं बहने बेटियां मातृशक्ति मंदिरों में जल चढ़ाने जाती हैं। जिसे रोकने के लिए शिवराज सरकार ने पाबंदी लगाई है। यह प्रदेश की भाजपा सरकार धर्म विरोधी सरकार होने की भूमिका निभा रही है । जब सभी सामान्य स्थिति है तो इसे कठिन क्यों बनाया जा रहा है । लोगों को क्यों डराया जा रहा है। भंडारे का आयोजन आम लोगों ने स्वेच्छा से बंद किये हुए है तो खान पान के ठेले व दुकानों को बंद क्यो कराया जा रहा है। कोविड-19 का पालन करना उचित है पर उत्सव मनाने से रोकना सरकार के आदेश अनुचित हैं । बाजार भरे हैं । आवागमन चालू है । शासकीय अशासकीय सारे कार्य प्रारंभ है। राजनीतिक आयोजनों को खुली छूट है तो धार्मिक सामाजिक कार्यों पर पाबंदी क्यों है । ऐसे आदेशों को मान्य करना अनिवार्य नहीं है। यदि शासन ने अपना अड़ियल रुख अपनाया तो कांग्रेस आंदोलन करेगी। नवरात्रि व ईद मिलादुन्नबी के अलावा अन्य धार्मिक आयोजनों को परंपरागत से मनाने के लिए आम जनता से अपील करती है।



