नर्मदा के पंचवटी घाट की तेज जलधारा में खड़ी चमत्कारी माता की प्रतिमा : सन् 1983

जबलपुर दर्पण नगर संवाददाता पाटन। जबलपुर जिले के पाटन तहशील के बाजार वार्ड में माँ दुर्गा की प्रतिमा की स्थापना कर माँ के भक्तों द्वारा पूरे नौ दिन माँ की आराधना में लीन पाटन नगर के वासी, अचानक से चमत्कारी माता की लीला से संपूर्ण जिला संपूर्ण मध्यप्रदेश एवं देश में इस विचित्र घटना से माँ के भक्त इसे माँ का चमत्कार मानने लगे। बात है । 1983 के दशहरा पर्व की जबलपुर पाटन तहशील के बाजार वार्ड में स्थापित दुर्गा प्रतिमा की,माँ दुर्गा समिति के द्वारा पंचवटी भेड़ाघाट में माँ नर्मदा की पवित्र जलधारा में विसर्जन का निर्णय आयोजकों द्वारा लिया गया, दशमी के दिन आयोजकों के द्वारा हवन पूजन कर मां की विदाई की तैयारी बैंड बाजे के साथ पंचवटी घाट पहुँचे और नर्मदा की तेज जल धारा में प्रतिमा का विसर्जन किया गया, तेज प्रवाह में प्रतिमा दो तीन बार डूबकर फिर पानी के ऊपर उभर आयी और सीधे बीच जलधार में खड़ी हो गयी। पानी की गहराई में तथा बीच जलधार में जहाँ प्रतिमा विसर्जित की गई वहां से लगभग 30 फुट आगे जाकर प्रतिमा खड़ी हो गयी थी। प्रतिवर्ष पंचवटी घाट पर अनेक प्रतिमाओं का विसर्जन होता था पर ऐसी घटना पहले कभी नहीं घटी। उपस्थित जन समुदाय के जयकारे गूंजने लगे, लोगों ने इसे प्रत्यक्ष चमत्कार माना,चमत्कार की सूचना जैसे ही जबलपुर के आस पास के जिलों में फैली इसके छायाचित्र और समाचार स्थानीय प्रमुख अखबारों में रातों रात छप गये,सुबह अखबारों को पढ़कर लोगों को पता चला कि माँ दुर्गा की प्रतिमा अभी भी पानी में खड़ी है लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी दर्शन के लिये और सभी इस घटना को अपनी आँखो से देखने की ललक में सुबह से प्रसाद फूलमाला उक्त प्रतिमा के फोटोग्राफ व अन्य सामग्रियों की दुकानें पंचवटी घाट और आसपास सज गयीं देखते ही देखते विशाल मेला लग गया। तीन दिन तक देवी की प्रतिमा तेज जल धारा में खड़ी रही । स्थल पर लोगों का आना बढता देख जिला प्रशासन भी चौकन्ना हो गया और सुरक्षा की व्यवस्था में लग गया जिसने भी माँ की लीला देखी वह आश्चर्यचकित था। मूर्ति का अधिकांश हिस्सा जो पानी के ऊपर था ज्यों का त्यों बिल्कुल जलधार के बीचों बीच खड़ा रहा आखिर जनता इसे चमत्कार न माने तो क्या माने भीड़ बढने के कारण जिला प्रशासन को संभालना मुश्किल हो गया। कोई बड़ा हादसा न हो जाये इसलिये तीन दिन बीत जाने के बाद रात में यह निर्णय लिया गया कि मूर्ति का विसर्जन रात में कर दिया जाए। गोताखोरो को बुलाया गया वे बीच जलधार में गये उन्होंने बताया कि नदी के अंदर की चट्टानों में लकड़ी के पटिये फंसे है, लकड़ी के उन्हीं बड़े पटियों में प्रतिमा स्थापित थी गोताखोरो ने पानी के अंदर जो भी देखा महसूस किया वह सच होगा फिर भी लोग प्रत्यक्ष चमत्कार ही मान रहे थे प्रतिमा पानी के तेज बहाव में सीधे खड़ी सबको दिख रही थी विशाल जल धारा के अंदर क्या स्थिति है यह तो दिख नहीं रहा था। तेज जलधार और गहराई में प्रतिमा कैसे फंसकर बिल्कुल सीधे खड़ी थी, यह अत्यंत आश्चर्य जनक घटना तो थी ही। पाटन नगर वासियों की, चमत्कारी माता के प्रति आस्था है जो भी भक्त सच्चे मन से यहां आकर पूजन अर्चन करता है। माँ उन सभी भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं। जिनके द्वारा आज यह भक्तिमय प्रसंग याद दिलाया, उनका जबलपुर दर्पण परिवार की ओर से बहुत-बहुत धन्यवाद



