यदि आप स्वयं से प्रेम करते हैं तो ध्यान द्वारा अपना अन्तरावलोकन अवश्य करें- निर्मला देवी

जबलपुर दर्पण। मानसिक स्वास्थ्य आज पूरे विश्व के समक्ष एक चुनौती के रूप में उपस्थित हैं। चाहे वह व्यक्ति किसी भी उम्र का हो, सहयोग दवारा न केवल आप मानसिक स्वास्थ्य पा सकते ब्लकि अपनी जीवन की सभी समस्याओं का हल पा सकते हैं जो कि कुण्डलिनी जागरण दवारा सम्भव है। जबकि मस्तिष्क के क्षणिक आवेग ,क्रोध ,ईर्ष्या ,तनाव एवं भावनात्मक असंतुलन को ठीक करना ही मानसिक स्वास्थ्य कहलाता है। ध्यान से प्रतिक्रियाएँ कम होती है निर्विचारिता बढ़ती हैं चित्त की संतुष्टि और प्रसन्नता भी सकारात्मक परिणाम को तय करती है। वास्तव में संसार को अधिकांश मनुष्यों ने तीन स्तरों पर अनुभव किया है जिसे हम शरीर, मन, बुद्धि, कहते हैं,यही तीनों त्रिआयाम कहलाते हैं परंतु कुछ प्रज्ञावान पुरुषों ने इसे आत्मा के स्तर पर भी अनुभव किया और पाया कि चौथा आयाम पूर्व में उल्लखित तीनों आयामों से निराला है, इसी का अभ्यास कराता है! सहजयोग। मानसिक स्वास्थ्य से ही आध्यात्म में प्रगति संभव है।



