जल संसाधन विभाग की लापरवाही से शाहपुर के किसान हुए बेहाल

आत्महत्या की चिता पर देखकर किसान को नींद कैसे आ रही है प्रदेश के प्रधान को
गरीबो की देखभाल प्रशासन का पहला धर्म है इस धर्म की पालना में जिस किसी से चूक हो ,उसके साथ भी मुल्जिमों जैसा ही सुलूक हो
शाहपुर संवाददाता। डिंडौरी जिला मुख्यालय से महज 13 कि ,मी,दूर शाहपुर सहित आस पास के कृषक जलसंसाधन विभाग की निरंकुश कार्य प्रणाली के परिणाम स्वरूप मौत के मुहाने पर आकर खड़े हो गए है रबी की फसलों की बोवनी माह अक्टूबर नवंबर में हो जाती है लेकिन अब तक गोरखपुर, जलाशय एवं बरछा जलाशय की नहरों की सफाई नहीं होने के चलते नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा चुका है जिससे ज्यादातर किसानों के खेतो में अभी तक हल नहीं चल सके हैं वहीं जिन किसानों ने फसल की बोवनी कर दिया है वह भगवान भरोसे बैठे अपनी किस्मत को कोस रहे है । ग्राम शाहपुर , पौड़ी टोला, पांडा टोला, रकरिया रैयत, बालपुर माल ,बालपुर रैयत, सहित आसपास के किसानों ने बताया कि इनके द्वारा जलसंसाधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद दो माह से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी विभाग के जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद में मस्त है वहीँ जिन अन्नदाताओं ने अपने खेतों में कर्ज लेकर रबी फसल की बोवनी कर दिया है उनकी फसल की उपज होने को रही ऐसे में इनके परिवार तथा स्वंय के सामने जीवन यापन करने का संकट सुरसा की तरह मुँह बाये खड़ा हुआ है जिसकी कहानी हरयाली की जगह सूखे वीरान पड़े किसानों के खेत अपनी ही जुबानी बयां कर रहे है किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि पूर्व में गोरखपुर जलाशय के अध्यक्ष रहे सतीश जायसवाल एवं जलसंसाधन विभाग के जिम्मेदारों ने नहरों के रख रखाव के लिये आने वाली राशि का जमकर दुरुपयोग किया क्योंकि निर्माण के बाद से इनके द्वारा नहरों में साफसफाई सहित कभी मरम्मत का कार्य नहीं कराया गया जहाँ एक ओर केंद्र सरकार के साथ प्रदेश सरकार अन्नदाता किसानों के लिए कल्याणकारी योजनाएं चला रही है वहीं जिले के जिम्मेदार आला अधिकारी शासन की मंशा पर पानी फेरते नजर आ रहे है जिसे देख कवि डॉ हरिओम पवार जी की ये पंक्तियाँ सटीक बैठती है।



