डिंडोरी दर्पणमध्य प्रदेश

मत्स्य उद्योग मछुआ जाति को छोड़, अपात्रों को दे रहा योजनाओं का लाभ

डिंडोरी,जबलपुर दर्पण ब्यूरो। मध्यप्रदेश शासन के शिवराज सरकार में अधिकारी शासन की नीति निर्देशों का कोई पालन नहीं कर रहे, जिससे वास्तविक व्यक्तियों तक योजना का लाभ नहीं पहुंच रहा। बताया गया कि सहायक संचालक मत्स्य उद्योग डिंडोरी के अधिकारियों की मनमानी की सीमा चरम पर है, जिसके कारण लगभग 6 सालों से बिलगांव सिंचाई जलाशय के स्थानीय वंशानुगत मछुआ जाति के लोग न्याय पाने के लिए भटकने के लिए मजबूर हैं। आरोप लगाया गया कि विभाग के अधिकारी द्वारा मध्यप्रदेश शासन के मछली पालन करने के दिशा निर्देशों में मछुआ नीति 2008 की गलत व्याख्या कर निजी स्वार्थ के लिए अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। मछुआ नीति 2008 के पेज क्र. 9 बिंदू क्र. 1.1 मछुआ की परिभाषा में मछुवारा अपनी जीविका का अर्जन मछली पालन, मछली पकड़ने या मछली बीज उत्पादन आदि कार्य से करता हो। वंशानुगत मछुआ जाति में धीवर, ढीमर, भोई, कहार, कश्यप, सिगरहा, सोंधिया, रायकवार, बाथम, मल्लाह, नावड़ा, केवट, कीर, माझी समाज के लोग आते हैं।

विभागीय अमला बोला, जो पकड़ेगा मछली वहीं होगा मछुआरा :-  मामले को लेकर दर्जनों की संख्या में सजातीय लोग कार्यालय पहुंचे, जहां पूछने पर बताया गया कि अगर कोई भी व्यक्ति मछली पकड़ता है, चाहे वह बंसी लगाकर या मच्छर दानी से खींचकर या फिर कोई भी अन्य तरीकों से मछली पकड़ने का काम करता है, वह मछवारा ही कहलाता है। गौरतलब है कि मछली नीति के पेज क्र. 21 बिंदू क्र.2.3 सिंचाई जलाशय पर विस्थापित व प्रभावित मछुवारों की समिति का गठन सिंचाई परियोजना के निर्माण के साथ ही होता है। विस्थापित एवं प्रभावित होने वाले वंशानुगत मछुआ जाति को मत्स्य पालन, मत्स्य विकास के अधिकार में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जावे। जिसकी जमीन डूब मे आती है, उसे प्राथमिकता है, चाहे वह किसी भी वर्ग का व्यक्ति हो, उसे मछली मरना आता हो या न आता हो वह पत्र है। इन सारी बातों से स्पष्ट है कि किस तरह अधिकारी अपात्र एवं फर्जी लोगों को मछुवारा बनाकर लाभ पहुंचा रहे है। डिंडोरी जिले में अधिकांश मछुआ सहकारी समितियां अपात्र लोगों की बनाई गई है, फिर उन्हें अब लाभ पहुंचाया जा रहा है। मछुआ नीति 2008 में वंशानुगत मछुआ जाति को मत्स्य पालन मे प्रथम प्राथमिकता देने को है। बावजूद जिले के सबसे बड़े बांध बिलगांव सिंचाई जलाशय में मछली पालन हेतु स्थानीय वंशनुगत मछुवारों को बेदखल करते हुए, फर्जी तरीके से अपात्र लोगों की समिति बनाकर उन्हें पट्टा आवंटन करने की कार्यवाही की गई है,जो अनुचित है।

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