डिंडोरी दर्पणमध्य प्रदेश

संचालक अनुसंधान के डाॅक्टर जीके कोतू ने किया एकीकृत मछली पालन इकाइयों का दौरा 

डिंडोरी,जबलपुर दर्पण ब्यूरो। मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों का सुदूर जिला डिंडोरी जहां परंपरागत तौर पर खाद्य फसलों का उत्पादन किया जाता है | जिले में मछली पालन की काफी संभावनाएं हैं, यह किसानों के लिए आर्थिक उन्नति का स्रोत बन सकता है। यह बात को साबित करके करौंदी गांव के टेकेश्वर साहू और जानकी साहू ने कर दिखाया है। बुधवार को अवलोकन जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के निदेशक अनुसंधान सेवाएं डॉक्टर जीके कोतू ने किया, उसके साथ समन्वयक डॉक्टर पीएल अम्बुलकर, वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन में डॉक्टर सत्येंद्र कुमार, वैज्ञानिक, मछली पालन के द्वारा किया गया। जिले के शहपुरा तहसील के करौंदी गांव के किसान टेकेश्वर साहू और जानकी साहू ने मत्स्य उद्योग विभाग डिंडौरी द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ लेते हुए एक-एक हेक्टेयर के क्षेत्रफल में तालाब का खुदाई का कार्य करवाया था और मछली पालन का कार्य शुरू किया, यह कार्य इनके लिए नया था और अनुभव की भी कमी थी। कालांतर में इनकी मुलाकात कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर सत्येंद्र कुमार से हुई, उन्होंने इन दोनों किसानों को मछली के साथ-साथ तालाब के बांध के ऊपर सब्जी-भाजी फल-फूल एवं और अरहर का उत्पादन लेने के लिए प्रेरित किया। डॉक्टर कोतू ने करौंदी के किसान टेकेश्वर साहू के द्वारा तालाब की मेड़ के ऊपर लगाए गए फलदार  पौधों की प्रशंसा की और बताया कि इस तरह के नवाचार किसानों की आय दोगुनी करने और आर्थिक उन्नति में सहायक सिद्ध होंगे। टेकेश्वर साहू ने एक हेक्टेयर के तालाब से 3 टन मछली उत्पादन होने की संभावना जताई है, साथ ही यह भी बताया कि विगत वर्ष बांध पर लगी अरहर का उत्पादन 4 क्विंटल हुआ। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियां सेम, बरबटी, आदि से लगभग 25000 रूपए की आमदनी हुई, अनार के पौधे में भी अच्छे फल लगने शुरू हो गए हैं, जहां से उन्हें और भी आय होने की संभावना है। तालाब की मेड़ के ऊपर पपीते और केले से 15000 रुपए सालाना आय प्राप्त होने की उम्मीद है। भ्रमण कार्यक्रम के संचालन में कृषि विज्ञान केंद्र से अवधेश पटेल और श्वेता मसराम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

किसानों ने प्रोफेसर को बताई सफलता की कहानी :- भ्रमण के दौरान करौंदी निवासी किसान टेकेश्वर साहू ने बताया कि टमाटर और मिर्च की नर्सरी भी तालाब की मेड़ पर लगा दी गई है और आने वाले दो-तीन दिनों में इसकी रोपनी कर दी जाएगी। वहीं जानकी साहू ने भी अपने द्वारा तालाब में की जा रही मछली पालन के साथ-साथ सिंघाड़ा उत्पादन को दिखाते हुए यह बताया कि पिछली बार सिर्फ एक मेड़ से 25000 रूपए की सब्जी बेची, जहां तीनों तरफ की मेड़ पर सब्जी लगे हुए हैं, जहां से अरहर का उत्पादन 2 क्विंटल हुआ था। जिले के किसान भी अपनी अनुपयोगी बंजर भूमियां पर मछली पालन के साथ-साथ सब्जी, फल-फूल सहित अन्य व्यवसाय कर किसान अपनी आय दुगुनी कर लाभ कमा सकते हैं।

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