कथित घोटाले बाज जनप्रतिनिधि, चुनाव आते ही दिखाने लगे दम-खम

डिंडोरी,जबलपुर दर्पण ब्यूरो। जिले भर में त्रिस्तरीय पंचायती राज चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज है, एक बार फिर पंचायती चुनाव आते ही दलाल भी सक्रिय हो गए हैं। गौरतलब है कि पंचायत चुनाव नजदीक है, गांव मे कथित सरपंचों की लिस्ट तैयार होने लगी है, लेकिन कोई भी भावी सरपंच विकास के लिये नही है। यही कारण है कि आज भी आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडोरी के ग्रामीण इलाकों सहित आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के गांवों के गरीबों का उत्थान नहीं हो पाई है। बताया गया की अधिकतर उम्मीदवारों को सरपंच की जिम्मेदारी व अधिकार तक का पता नहीं होते। इन दिनों भी कुछ ऐसे ही कथित पूर्व सरपंच, जनपद सदस्य व जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दावेदारी कर रहे हैं। कुछ जनप्रतिनिधि केवल पदों को भ्रष्टाचार कर पैसा कमाने का स्त्रोत मानते हैं, ऐसे लोग एक बार फिर चुनावों की तैयारियां कर रहे। बताया गया कि नरेगा में गरीबों को फायदा, गरीबो के आवास के लिए कभी कोई प्रयास नही किया जा रहा, सिर्फ अपने चहैतो के विकास के लिए प्रयास किए जाते रहे हैं।
गाँव की सरकार चुनने मे जागरुकता की विशेष जरूरत :- गांव की सरकार बनाने में लोगों को विशेष रूप जागरूक रहने की जरूरत है। सरपंच ऐसे चुने गाँव को अपना घर मानकर काम करे, जनता को शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार व राहत प्रदान करने मे जो ताकत कुर्बान कर सके। गली चौराहा में बैठने की व्यवस्था की जाए, मुख्य स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए, जिससे हो रहे लड़ाई जगड़े, गाली गलौज बन्द हो सके तथा गंदे पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। पंचायती चुनावों के दौरान नोजवान भाईयो के लिए खेल मैदान, दौड़ के लिए ट्रैक, बास्केटबॉल, क्रिकेट, फुटबाल सभी खेलों के लिये समुचित व्य्वस्था होनी चाहिए। गांव में गार्डन बनाये जाए, जिससे गांव की सुंदरता अलग नजर आए। लेकिन राजनीती करने वाला सरपंच कभी विकास नही करवा सकता, वो सिर्फ पैसे खाने में रहते है। ऐसे लोगो से भी सावधान रहें, जिनके ऊपर कहीं बड़े बड़े लाखो के गोटाले चल रहे है। ग्राम पंचायत के बजट को आम जनता के बीच रखकर आम जनता के हित में कार्य करवाएगा। ग्राम पंचायत में वार्षिक बैठक के दौरान ग्राम में वर्ष भर में कितना विकास कार्य हुआ, कितना खर्च हुआ कितना बचत है, संपूर्ण विवरण आम जनता को बताये। ग्राम पंचायत के युवाओं को रोजगार दिलवाने की मजबूत पेरवी करे, ग्राम पंचायत के सभी मुख्य मार्गों का डामरीकरण करवाना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय बनाना एवं गांव के सार्वजनिक स्थल पर शौचालय बनाना। ग्राम पंचायत पर जनसुनवाई केंद्र स्थापित करना और आम समस्या का समाधान करना। पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था करवाने के प्रयास करना, ग्राम पंचायत में हर दुकान के आगे कचरा पात्र लगाना। गांव का सरपंच शिक्षित होना चाहिए, जो गांव की कमियों को दूर कर सकें,सरपंच ऐसा हो जो गांव के लोगों की समस्या को प्राथमिकता से लेकर उन्हें हल करवाएं, जिससे गांव का हर व्यक्ति अपने सरपंच से सहानुभूति रख सकें।



