अधिकारी व ठेकेदारों की यारी नहरों की दुर्दशा पर पड़ी भारी

ठेकेदारों की मनमानी फिर भी साहब के चहेते
जबलपुर दर्पण नगर संवाददाता सिहोरा। जिले के अन्नदाता किसान को जिले में बनी नहरों से हो रही परेशानी को देखते हुए लगातार खबर प्रकाशित की जा रही है। उसके बावजूद भी विभाग के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। ताजा मामला सिहोरा विधानसभा क्षेत्र 102 के अंतर्गत आने वाली बरगी दाई तट छोटी नहरों के निर्माण कार्य के कुछ ही समय में हालत खस्ता दिखाई देने लगीं। वह अधिकारी भी यहां आकर देखे जिनके चहेते ठेकेदारों ने यह काम किया है। सिहोरा क्षेत्र की सीमा से लगी हुई बरगी बड़ी नहर परियोजना द्वारा खितौला हिरन नंदी के बाजू से छोटी माइनर दाई तट नहर को निर्माण हुये अभी एक वर्ष भी पूरा हुआ हैं। ठेकेदारों के द्वारा निर्माण कार्य के बाद इस नहर की हालत ऐसी हो गई हैं। जैसे कि मिट्टी की दीवार से बनी हुई नहर मिट्टी के समान हो गई। इसका प्रमुख कारण जिले में बरसों से जमे बैठे भ्रष्ट अधिकारी है। जिले में बैठे उच्च स्तरीय अधिकारी और ठेकेदार की यारी ये तो जग जाहिर है। साहब ठेकेदार की शान में कुछ भी बुरा सुनने तैयार नहीं हैं। और हो भी क्यों ना ठेकेदार साहब का कमाऊपूत जो है। अब देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात से इन अधिकारियों का पेट तो नहीं भरने वाला है। उनको तो काम कैसा भी हो कमीशन पूरा चाहिए। साहब के चहेते ठेकेदारों जिले की खस्ताहाल नहरों जिम्मेदार है। ये साहब के चहेते ठेकेदार सरकार की लुटिया डुबोने में लगें हुये हैं। जबकि राज्य सरकार ने इन सभी नहरों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए लाखों रुपये खर्च कर इनकी देख रेख करने चौकीदार व अधिकारियों को हर माह उच्च वेतन मुहैय्या करा रहीं है। जबकि किसान के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराने के लिए किसानों द्वारा रकवे के हिसाब से नहर के पानी की रसीद भी कटवानी पड़ती हैं। फिर भी नहरों की हालत खराब ही रहेंगी। और खाना पूर्ति होती रहेंगी ।
ब्लॉक में नहीं रहते डिवीजन अधिकारी- जब भी नहरों की समस्या को लेकर इन उच्च अधिकारियों से मिलने आफिस जाते हैं तो हमेशा ही ये अधिकारी फील्ड में होने की बात कहते हैं और इनका फील्ड इनका घर होता है। शासकीय कार्यालयों में लगीं हुई गाड़ियों में प्रशासन के पैसों के डीजल का दुरूपयोग करते हुए इन साहब के परिवार के लोग मार्केट में घूमते दिख जायगे। इन सभी समस्याओं को लेकर जिले के बहुत से किसानों ने इनकी सीएम हैल्पलाइन 181 पर शिकायत भी दर्ज कराई है। कई लोगों ने जिलाधिकारी कार्यालय में जाकर लिखित शिकायत भी की है। देखा जाये तो सभी जान कर भी बने हैं अनजान।






