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किसके संरक्षण में चल रहा मुरूम का अवैध उत्खनन, जवाबदार मौन क्यों है

जबलपुर दर्पण पाटन ब्यूरो। खनिज संपदा मनुष्य को प्रकृति से मिलने वाली अमूल्य धरोहर है जिसका समुचित उपयोग पर्यावरण एव मानव जीवन के हितार्थ को ध्यान में रखकर शासन की निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार किया जाना चाहिए। परन्तु दुर्भाग्य से सत्ता धारियों की छत्रछाया में पाटन क्षेत्र के खनिज पदार्थों का अन्धाधुन्ध दोहन हो रहा है। जिस प्रकार खनिज पदार्थों का दोहन किया जा रहा है। उसके कारण खनिज भण्डार धीरे-धीरे समाप्त होने की कगार पर है। भू-गर्भ में प्राय: सभी खनिज सीमित मात्रा में है। खनिज संसाधन और खदानों का संरक्षण उसी प्रकार आवश्यक है जिस प्रकार पर्यावरण संरक्षण जरूरी है किन्तु इसके बाद भी जबलपुर जिले के पाटन तहसील के अंतर्गत आने वाली वन परिक्षेत्र की पहाड़ी जो की ग्राम ग्वारी और धनेटा की सीमा से लगी है। इस पहाड़ी पर हार्ड मुरूम खनिज सम्पदाओं का दोहन रात होते ही शुरू होता है। और प्रात:होने तक जारी रहता है। इस उत्खनन को रोंकने के सार्थक प्रयास प्रशासन ने आज तक नही किये गए। अवैध उत्खनन करने वाले किसी न किसी पद पर विराजमान है। जिसके कारण प्रशासन मजबूरी वस कोई कार्यवाही नही कर पाता है। जबकि प्रदेश के मुखिया खुले मंचो से कई बार बोल चुके है अवैध उत्खनन करने वालों को क्रेस कर दो,जमीन में गाड़ दो,उनके आशयाने पर शासन का बुल्डोजर चला दो शायद यह बात पाटन विधान सभा में लागू नही होती तभी तो मुरूम का अवैध उत्खनन करने वालों के हौसले बुलंद हैं।

पाटन तहसील में मुरूम की आवंटन खदाने। पाटन तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम कुमगवा में खनिज विभाग द्वारा दो खदाने आवंटन है। पहली खदान 2 हेक्टयर और दूसरी खदान 1.66 हेक्टयर आवंटन  है। इन खदानों की मुरूम का मय रॉयल्टी के साथ पाटन में 3800 से 4000 रुपए में हाईवा ग्राहकों को आसानी से मिल जाता है। जिसमे खनिज विभाग को 56 रू प्रति घनमीटर पैसा मिलता है। एक हाईवा में 15-16 घन मीटर मुरूम आती है जिसमे लगभग खनिज विभाग को 840 से 900 रू तक प्रति गाड़ी रॉयल्टी के रूप में पैसा मिलता है। खनिज का परिवहन करने के लिए पहले आपको अपना हाईवा,डंफर खनिज विभाग में रजिस्टर्ड करवाना पड़ता है। जबकि पाटन के अधिकांश डंफर हाईवा माइनिंग विभाग में रजिस्टर्ड ही नहीं है और जब हाईवा डंफर रजिस्टर्ड नहीं है तो माइनिंग विभाग से रॉयल्टी नही बन सकती है। यह खनिज विभाग का नियम है। फिर भी धड़ल्ले से पाटन के हाईवा डंफर मुरूम का अवैध परिवहन करने में लगे हैं। जब ग्वारी-धनेटा की आवंटित नही है मुरूम खदान,फिर किसके संरक्षण में चल रहा मुरूम का अवैध उत्खनन। खनिज सूत्रों की मानें तो जिले के पाटन तहसील में अवैध उत्खनन,अवैध कार्यों को सुचारू रूप से चलाने वालो की सत्ता संगठन में अच्छी खासी पैठ है। आश्चर्य यह है कि जब चंद दूरी पर शासन की दो-दो मुरम खदानें आवंटन है। इसके बाद भी चारो ओर बेतहाशा मुरुम का अवैध उत्खनन आखिर किसके संरक्षण पर हो रहा है। मार्गो के कार्य में लगने वाली मुरुम,प्राईवेट वेयर हाउस में लगने वाली मुरूम,घरों में लगने वाली मुरूम आखिर कहां से उत्खनन कर लाई जा रही है। आज तक न ही राजस्व अमला न ही वन विभाग अमला मुरूम के अवैध उत्खनन पर अंकुश लगा पाया है। खनिज विभाग और पुलिस अमला इन अवैध उत्खनन को रोकने में अभी तक नाकाम रहे है।
सूत्रो की मानें तो अवैध उत्खनन कर्ता पाटन एव आसपास के क्षेत्र में हार्ड मुरूम 2800 से 3000 रू में हाईवा खाली कर देते है जबकि इनका खर्च न के बराबर होता है। यह प्रति गाड़ी लगभग 1500 से 1800 रू तक बचा लेते है। रात भर में सैकड़ों हाईवा अवैध मुरूम मार्केट में खाली कर अच्छा खासा पैसा बना रहे है। मुरूम के अवैध उत्खनन की जानकारी सभी को होती है। इन सभी विभागों को कुछ न कुछ आर्थिक लाभ अवैध उत्खनन कर्ता पहुंचा देते है जिसके कारण ये विभाग,खनिज विभाग,वन विभाग,प्रशासन,और पुलिस विभाग को जानकारी होने के बाद भी कोई कार्यवाही नही होती है। यही इसकी प्रमुख वजह है। ग्रामीणों की मांग है एक बार जिले के कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक स्वयं सयुक्त रूप से इस क्षेत्र का औचक निरीक्षण करके देखें,आखिर आज तक इन अवैध उत्खनन करने वालों पर कार्यवाही क्यों नहीं हुई इसका दोषी आखिर कौन है।

ग्राम ग्वारी-धनेटा तह.पाटन जिला जबलपुर स्थित मुरूम का अवैध उत्खनन जारी

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