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वनग्रामों में सुविधाओं का टोटा, विकास के दावे फुस्स

डिंडोरी, जबलपुर दर्पण ब्यूरो। जिले के अधिकतर वन ग्रामों में आज भी सुविधाओं का टूटा पड़ा हुआ है, जहां सरकार के द्वारा किए जा रहे विकास के बड़े बड़े दावे फुस्स ही नजर आ रही हैं। गौरतलब है कि जिले के अधिकतर वन ग्रामों में विकास के नाम पर लाइट तो लगा दिए गए हैं, लेकिन लगातार उनमें करंट नहीं दौड़ पा रहे, जिससे कई गांवो के लोग आज भी कई दिनों तक अंधेरों में ही रात गुजारने को मजबूर रहते हैं। बताया गया कि आदिवासी बाहुल्य जिला होने के कारण विकास के लिए भारी-भरकम बजट भी सरकारों के द्वारा भेजी जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर नतीजे सिफ़र ही नजर आ रहे हैं। जिले के वनग्रामों में जाकर आसानी से हुए विकास कार्यों का अंदाजा लगाया जा सकता है। मिली जानकारी अनुसार आज भी दर्जनों वन ग्रामों में पक्की सड़क मार्ग, शुद्ध पेयजल व्यवस्था, पर्याप्त विद्युत व्यवस्था, उचित शिक्षा की व्यवस्था सहित व्यवसाय का अभाव लंबे समय से बना हुआ है। आज भी बैगाअंचल क्षेत्रों के ज्यादातर लोग जीवन यापन करने के लिए जंगल पर ही निर्भर रहते है, उन्हें मुख्यधारा से जोड़कर रोजगार की उपलब्धता सुनिश्चित करवाने सहित लघु एवं कुटीर उद्योगों का विकास करने कोई प्रयास नहीं किए गए, यही कारण है कि सुविधाओं के लिए आज भी वन ग्रामों के लोग मोहताज हैं। विधुत समस्याओं को लेकर पिछले दिनों करंजिया व बजाग जनपद के दर्जनों लोग कलेक्ट्रेट पहुंचकर आक्रोश जताते हुए, जमकर नारेबाजी की गई, उनके साथ जिला पंचायत अध्यक्ष रूदेश परस्ते भी मौजूद रहे। जहां समस्या का जल्द समाधान नहीं करने पर आंदोलन करने की चेतावनी जिला प्रशासन को दी गई है।

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