डिंडोरी दर्पणमध्य प्रदेश

शासकीय स्नातक महाविद्यालय के विद्यार्थीयों ने देखा, जैविक खेती का लाइव डेमो

डिंडोरी, जबलपुर दर्पण ब्यूरो। जिले के शहपुरा जनपद में धारा सरस्वती शैक्षणिक एवं समाज उत्थान समिति डीएसएस मध्यप्रदेश द्वारा समाज के विभिन्न आयामों में कार्य कर रही है, पौधारोपण, शिक्षा, स्वास्थ्य, विधिक जागरूकता सहित जैविक खेती आदि अन्य के बारे में जानकारी दी जा रही है। समिति से सम्बंधित नर्मदांचल जैविक कृषि फार्म ढोंढा में जैविक उत्पाद व जैविक खेती के बारे में प्रशिक्षण दिया साथ ही विद्यार्थीयों को प्रायोगिक जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया को बताया गया। जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारीलाल साहू ने किसान बंधुओ को जैविक खेती करने का तरीका व प्रायोगिक जानकारी लगातार कृषकों को दे रहे है। इसी क्रम में आज शासकीय स्नातक महाविद्यालय शहपुरा के लगभग 50 छात्र-छात्राओं ने नर्मदांचल जैविक कृषि फार्म ढोंढा पहुंचकर जैविक उत्पाद के बनाने का लाइव डेमो दिखाई गई, जिसमें जीवामृत, केचुआ खाद, अग्नीअस्त्र, ऐजोला खाद की विस्तृत जानकारी दी गई। इसी तरह विद्यार्थीयों ने कृषि फार्म में लगे सब्जीयों को देखा, जोकि पथरीली जमीन में लगी हुई है, परन्तु फसल अच्छी हुई है।जीवामृत बनाने के लिए आवश्यक निर्माण सामग्री प्रति एक एकड़ में दस किलोग्राम देशी गाय का गोबर पांच से दस लीटर गोमूत्र दो किलोग्राम गुड़ या फलों के गुदों की चटनी दो किलोग्राम बेसन चना, उड़द, मूंग दो सौ लीटर पानी पचास ग्राम मिट्टी साथ में रखें। सर्वप्रथम कोई प्लास्टिक की टंकी या सीमेंट की टंकी लें फिर उस पर दो सौ लीटर पानी डाले, पानी में दस किलोग्राम गाय का गोबर व पांच से दस लीटर गोमूत्र एवं दो किलोग्राम गुड़ या फलों के गुदों की चटनी मिलाएं। इसके बाद दो किलोग्राम बेसन, 50 ग्राम मेड़ की मिट्टी या जंगल की मिट्टी डालें और सभी को डंडे से मिलाएं और टंकी को जालीदार कपड़े से बंद कर दें। सुबह शाम डंडे से घोल को हिलाएं, और चौबीस घंटे बाद जीवामृत तैयार हो जाएगा। इस जीवामृत का प्रयोग केवल सात दिनों तक कर सकते है साथ ही प्लास्टिक व सीमेंट की टंकी को छाए में रखे, जहां पर धूप न लगे। गोमूत्र को धातु बर्तन में न रखें, क्योंकि छाए में रखा हुआ गोबर का ही प्रयोग करें। प्रति एकड़ दो सौ लीटर तैयार जीवामृत सिंचाई के बहते पानी पर बून्द बून्द टपका कर दें, फसलों और पौधों पर जीवामृत का छिड़काव कर दें। छिड़काव करने से उनको उचित पोषण मिलता है और दाने, फल स्वस्थ होते हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर एस बी उरैती, डॉक्टर ओपी पटेल डीएसएस मध्यप्रदेश सचिव एडवोकेट निर्मल कुमार साहू, एडवोकेट लवकुश झारिया इसी तरह विद्यार्थियों में सिमि गुप्ता, नेहा साहू, लक्ष्मी साहू, निशी गुप्ता, वंदना,कृष्णा,शिवकुमार,प्रेमलता, हल्की मरावी,मीना,कंचन, जयंती, मदन, साधना, शिवानी, रजनी, अर्चना, राजा, यशवंत, फूलबाई, नीलेश्वरी, प्रियंका परस्ते, सतीष, मोनू, रणविजय, यशोदा, नेहा कुलस्ते, भारती, ममता, चन्द्र किशोर, प्रसांत, खेमलाल, कृष्णा धुर्वे सहित अन्य लोग मौजूद रहें।

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