बीड़ी श्रमिकों के साथ सरकार का बेहूदा मजाक

आवास के लिए सिर्फ पहली किस्त देकर भूले
जबलपुर दर्पण सिहोरा ब्यूरो रमेश बर्मन
सिहोरा तहसील के दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां बारिश से बचने के लिए अपने स्वयं मकान में रहने का ठिकाना नहीं है । इस वर्ष की बारिश में कुछ मजदूर परिवार अपने ही टूटे-फूटे मकानों में रहने के लिए मजबूर हैं। दूसरी तरफ कुछ मजदूर वर्ग के लोगों के पास मकान नहीं होने के कारण दूसरों के मकान में शरण लेकर अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं । इन बेसहारा लोगों की जीवन शैली का सरकार के द्वारा मजाक उड़ाया जा रहा है।सिहोरा से 10 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत ढकरवाल मैं बीड़ी श्रम आवास योजना के तहत मजदूर महिला रामवती रजक, रामभरोस हल्दकार, हेतराम कोरी, परमानंद यादव पिछले 20-10 और 20-11 में बीड़ी श्रम आवास योजना के तहत बीड़ी श्रम विभाग में , मकान बनाने के लिए आवेदन किया था । परंतु आज तक गरीब महिला का मकान अब तक अधूरा बना रह गया है । महिला रामवती ने बताया कि पिछले 10 वर्ष पूर्व प्रकरण क्रमांक 38 34 , आदेश क्रमांक 243 के तहत 20-10 20-11 में पहली किस्त ₹20 हजार बीड़ी श्रम विभाग के द्वारा दिया गया था । जिससे 6 फुट की दीवार, रैक, बीम, का निर्माण करा लिया है। 10 वर्ष पूर्व बीतने के बाद भी अब तक बीड़ी श्रम विभाग के द्वारा दूसरी या तीसरी किस्त मजदूर महिला सहित अन्य मजदूरों को नहीं मिल पाई है। जिससे आवास निर्माण कार्य 10 वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। क्षेत्र के लोगों की मांग है कि सरकार जनता का मजाक उड़ाना बंद करें और हम मजदूर वर्ग के आवास बनाने में सहयोग करें।



